जानिए किसके खिलाफ सबसे ज्यादा बार आया अविश्वास प्रस्ताव

211 0

नई दिल्‍ली। संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही बुधवार (18 जुलाई) को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पेश किए गए इस अविश्वास प्रस्ताव को विपक्षी एकता की कसौटी के रूप में देखा जा रहा है। असल में लोकसभा में कुल 8 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए थे, लेकिन स्पीकर ने सिर्फ टीडीपी के प्रस्ताव को स्वीकार किया। बता दें कि पिछले 4 साल में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ यह पहला अविश्‍वास प्रस्‍ताव है। आइए जानते हैं, क्‍या होता है अविश्‍वास प्रस्‍ताव, क्‍या है इसकी प्रक्रिया और किस सरकार के खिलाफ यह सबसे ज्‍यादा बार लाया गया।

क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव ?

दरअसल सत्‍तासीन सरकार के खिलाफ विपक्षी दल अविश्वास प्रस्ताव पेश करते हैं। इसे मंजूर या नामंजूर करने का अधिकार स्पीकर को है। केंद्र सरकार के मामले में इसे लोकसभा में और राज्य के मामले में इसे विधानसभा में पेश किया जाता है। अविश्‍वास प्रस्‍ताव स्वीकार होने के बाद सत्तासीन पार्टी को सदन में अपना बहुमत साबित करना होता है। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सदस्यों को कोई कारण बताने की जरूरत नहीं होती है। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में ही लाया जा सकता है,  इसे राज्‍यसभा में नहीं लाया जा सकता।

कब लाया जाता है अविश्‍वास प्रस्‍ताव ?

जब विपक्षी दलों को लगता है कि सरकार के पास सदन में पूर्ण बहुमत नहीं है या सरकार सदन का विश्वास खो चुकी है, तब अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। केंद्र के मामले में इस प्रस्ताव को लोकसभा में ही लाया जा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव कभी भी राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकता। नियम के मुताबिक, अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए संसद सदस्य को सुबह 10 बजे के पहले लिखित नोटिस देना होता है, जिसे लोकसभा स्पीकर सदन के समक्ष पढ़ते हैं।

50 सदस्‍यों का समर्थन जरूरी

अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सदन के कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है, तभी स्पीकर इसे स्वीकार करते हैं। प्रस्ताव स्वीकार होने के 10 दिन के भीतर इस पर चर्चा कराने का प्रावधान है। अगर ऐसा नहीं होता है तो अविश्‍वास प्रस्‍ताव को विफल मान लिया जाता है और प्रस्‍ताव लाने वाले सदस्‍य को इसकी जानकारी दे दी जाती है। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इस पर वोटिंग होती है। वोटिंग में अगर सरकार बहुमत साबित करने में सफल नहीं होती तो प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ता है और सरकार गिर जाती है। सरकार बने रहने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नामंजूर होना जरूरी है।

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कल, विपक्ष साधेगा निशाना तो मोदी भी देंगे करारा जवाब

पहली बार कब लाया गया अविश्‍वास प्रस्‍ताव ?

भारत के संसदीय इतिहास में पहली बार पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाया गया था। यह अविश्‍वास प्रस्‍ताव अगस्‍त 1963 में जेबी कृपलानी ने लोकसभा में पेश किया था। हालांकि मतदान के दौरान यह प्रस्‍ताव लोकसभा में पास नहीं हो सका, क्‍योंकि इसके पक्ष में सिर्फ 62 और विपक्ष में 347 वोट पड़े थे। तबसे लेकर अबतक 25 बार अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश किए जा चुके हैं।

सबसे ज्‍यादा अविश्‍वास प्रस्‍ताव किसके खिलाफ ?

लोकसभा में अबतक सबसे ज्‍यादा बार अविश्‍वास प्रस्‍ताव इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ लाया गया है। बता दें कि इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ कुल 15 बार अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाया गया था। इनके अलावा लाल बहादुर शास्‍त्री और पीवी नरसिंव राव की सरकार के खिलाफ 3-3 बार अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाए गए हैं।

अबतक एक बार ही गिरी है सरकार

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अबतक सिर्फ एक बार ही अविश्‍वास प्रस्‍ताव से सरकार गिरी है। यह मोरारजी देसाई की सरकार थी जो 1978 में अविश्‍वास प्रस्‍ताव स्‍वीकार होने की वजह से गिरी। मोरारजी इमरजेंसी हटने के बाद 1977 में प्रधानमंत्री बने थे। बता दें कि मोरारजी के खिलाफ दो अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाए गए थे। पहले प्रस्‍ताव से तो उन्‍हें कोई मुश्किल नहीं हुई, लेकिन दूसरे प्रस्‍ताव के समय उनकी सरकार के घटक दलों में मतभेद हो गए। हार का अंदाजा होते ही मोरारजी ने वोटिंग से पहले ही इस्‍तीफा दे दिया था। वहीं 1993 में अविश्‍वास प्रस्‍ताव से नरसिंह राव की सरकार गिरने का भी खतरा पैदा हो गया था, लेकिन ऐन मौके पर वे अपनी सरकार बचाने में कामयाब हो गए थे। हालांकि बाद में उनकी सरकार पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के दो सांसदों को प्रलोभन देने का आरोप लगा था।

ज्‍योति बसु के नाम रिकॉर्ड

केंद्र की सरकारों के खिलाफ सबसे ज्‍यादा बार अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का रिकॉर्ड मार्क्‍सवादी कम्‍युनिस्ट पार्टी के सांसद ज्योतिर्मय बसु के नाम है। उन्होंने कुल चार बार अविश्‍वास प्रस्‍ताव पेश किए थे और ये चारों प्रस्ताव इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ थे। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी ने विपक्ष में रहते हुए दो बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए हैं। उनका पहला प्रस्ताव इंदिरा गांधी सरकार के ख़िलाफ़ था और दूसरा नरसिंह राव सरकार के ख़िलाफ़।

क्‍या होता है विश्‍वास प्रस्‍ताव ?

अविश्‍वास प्रस्‍ताव जहां केंद्र में सत्‍तासीन सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा लाया जाता है, वहीं इसके विपरीत विश्‍वास प्रस्‍ताव सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए सत्‍ताधारी पार्टी की ओर से लाया जाता है। विश्‍वास प्रस्‍ताव तब लाया जाता है, जब सरकार को समर्थन देने वाले घटक दल समर्थन वापसी का ऐलान कर दें। नब्‍बे के दशक में विश्वनाथ प्रताप सिंह, एचडी देवेगौड़ा, आईके गुजराल सदन में विश्‍वास मत हार चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में दो बार विश्‍वास मत हासिल करने की कोशिश की लेकिन दोनों ही बार वे नाकामयाब रहे। 1996 में तो उन्‍होंने विश्‍वास प्रस्‍ताव पर वोटिंग से पहले ही इस्‍तीफा दे दिया था, जबकि 1998 में वे 1 वोट से विश्‍वास मत हार गए थे और उनकी सरकार गिर गई थी। वहीं 1979 में ऐसे ही एक प्रस्‍ताव के पक्ष में जरूरी समर्थन न जुटा पाने के कारण तत्‍कालीन चौधरी चरण सिंह की सरकार को इस्‍तीफा देना पड़ा था।

Related Post

रोजाना फिश खाएंगे तो रिटायरमेंट की उम्र में भी रहेंगे हेल्दी, बीमार होने की संभावना हो जाती है कम

Posted by - October 22, 2018 0
टेक्सास। अगर रोजाना फिश खाएंगे तो इसमें मौजूद सैल्मन, मैकेरल और सार्डिन जैसे तेल की वजह से आप हमेशा रिटायरमेंट…

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सांसद ज्योतिरादित्य से मांगी माफी, जानिए क्यों

Posted by - July 27, 2018 0
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में दिया था विशेषाधिकार हनन का नोटिस नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को गुना…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *