सिर्फ 25 रुपए में बच्चों में दूर होगी खून की कमी

134 0

लखनऊ। कहीं आपका बच्चा खून की कमी यानी एनीमिया का शिकार तो नहीं है ? ये सवाल हम इस वजह से पूछ रहे हैं कि भले ही बच्चा दिखने में ठीक – ठाक हो लेकिन उसे खून की कमी हो सकती है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में 6 महीने से लेकर 5 साल तक के बच्चों में से 58 फीसदी से ज्यादा में एनीमिया होता है।

आधी मौतों का जिम्मेदार है एनीमिया

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 की रिपोर्ट के मुताबिक आयरन, विटामिन, आयोडीन और जिंक की कमी से बच्चों में कुपोषण होता है। बता दें कि भारत में रोज 5 साल से कम जिन बच्चों की मौत होती है, उनमें से आधे से ज्यादा सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी से जान गंवाते हैं।

एनीमिया का भोजन की गुणवत्ता से संबंध
एनीमिया का भोजन की गुणवत्ता से सीधा संबंध होता है। भोजन की गुणवत्ता ठीक न होने से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। आयरन की इस कमी सेआयरन डिफीशियेंसी एनीमिया (IDA) हो जाता है। IDA से सभी आयु वर्ग के लोग प्रभावित होते हैं। सर्वे से पता चला कि 2005-06 में 69.5%,  बच्चों में एनीमिया था। जबकि, 2015-2016 में 58.5% बच्चो में एनीमिया पाया गया। बिहार में छोटे बच्चों के बीच एनीमिया दर 63.5% है। यह राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।

एनीमिया से बचाता है डीएफएस
हाल ही में बिहार में शोधकर्ताओं  मैरियन क्रैमर, अभिजीत कुमार, संतोष कुमार (सैम हयूस्टन यूनिवर्सिटी) और  सेबेस्टियन वोल्मर (यूनिवर्सिटी ऑफ़ गोतेंजन) ने मिड-डे मील को पकाने में डबल फोर्टीफाइड नमक (DFS) के इस्तेमाल से एनीमिया पर अध्ययन किया। इसमें उन्होंने हीमोग्लोबिन स्तर, एनीमिया,  इसका शिक्षा पर और स्कूल में बच्चों की उपस्थिति पर असर जाना। शोधकर्ताओं ने देखा कि स्कूली बच्चों में हीमोग्लोबिन और एनीमिया पर सांख्यिकीय रूप से सार्थक प्रभाव दिख रहे हैं। मिड-डे मील में डीएफएस के इस्तेमाल से हीमोग्लोबिन के स्तर में 1.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे किसी भी प्रकार के एनीमिया के होने की आशंका को 20% कम किया जा सका। जो छात्र स्कूलों में अनियमित थे, उनकी तुलना में नियमित आने वाले बच्चों को ट्रीटमेंट का ज्यादा फायदा मिला।
 
सिर्फ 25 रुपए हर साल खर्च करने होंगे
इस सर्वे का नतीजा ये निकाला गया कि लगभग 14 हजार बच्चों तक डीएफएस पहुंचाने के लिए हर बच्चे पर 0.36 डॉलर यानी 25 रुपए प्रति बच्चा प्रति साल खर्च हुए। ऐसे में आप भी डबल फोर्टीफाइड नमक का इस्तेमाल कर महज 25 रुपए सालाना के खर्च पर अपने बच्चे को खतरनाक एनीमिया से बचा सकते हैं।

किसने कलेक्ट किया डेटा

देश की जानी मानी रिसर्च कंपनी मोर्सेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने एक शोध के जरिए ये आंकड़े एकत्र किए हैं। नीति आयोग ने भी इसकी सराहना की हैं।

Related Post

इवांका ने कहा – चाय वाले का पीएम बनना असाधारण, मोदी हैं साहसी

Posted by - November 29, 2017 0
पीएम मोदी और इवांका ट्रम्प ने किया आठवें इंटरनेशनल ग्लोबल इंटरप्रेन्योरशिप समिट का उद्घाटन हैदराबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इवांका ट्रम्प ने…

गाय-भैंस का दूध निकालने में अब इस दवा का नहीं हो सकेगा इस्तेमाल, इंसानों के लिए है खतरनाक

Posted by - August 2, 2018 0
नई दिल्ली। गाय और भैंस से दूध हासिल करने के लिए दूधिए उन्हें ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन देते हैं। ये एक…

अखिलेश यादव दोबारा चुने गए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष

Posted by - October 5, 2017 0
मुलायम-शिवपाल की गैरमौजूदगी में आगरा अधिवेशन में प्रो. रामगोपाल यादव ने किया ऐलान  आगरा । उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *