‘कारवां गुज़र गया…’ के रचयिता गोपाल दास नीरज ने दुनिया को कहा अलविदा

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  • 94 साल की अवस्‍था में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान में ली अंतिम सांस

नई दिल्‍ली। मशहूर कवि और गीतकार पद्मभूषण से सम्‍मानित गोपालदास नीरज गुरुवार (19 जुलाई) देर शाम निधन हो गया। वो कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्‍हें आगरा में एक निजी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार की शाम को तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें आगरा से दिल्ली लाकर यहां एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उन्‍होंने अंतिम सांस ली।

आगरा में बेटी के घर आए थे

गौरतलब है कि 94 साल वर्षीय कवि नीरज इसी सोमवार को ही आगरा के बल्केश्वर में रहने वाली अपनी बेटी कुंदनिका शर्मा के घर आए थे। यहां मंगलवार सुबह नाश्ते के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई। इसके बाद उन्हें लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। फेफड़ों में संक्रमण के कारण तकलीफ ज्यादा बढ़ने से उन्हें सांस लेने में परेशानी होनी लगी थी। इसके बाद उन्‍हें बुधवार को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था।

इटावा में 1924 में हुआ था जन्‍म

कवि नीरज का जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के गांव पुरावली में 4 जनवरी, 1924 को हुआ था। उनके एक दर्जन से भी अधिक कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके कविता संग्रहों में ‘दर्द दिया है’, ‘आसावरी’, ‘बादलों से सलाम लेता हूँ’, ‘गीत जो गाए नहीं’, ‘नीरज की पाती’, ‘नीरज दोहावली’, ‘गीत-अगीत’, ‘कारवां गुजर गया’, ‘पुष्प पारिजात के’, ‘काव्यांजलि’, ‘नीरज संचयन’, ‘बादर बरस गयो’, ‘फिर दीप जलेगा’, ‘तुम्हारे लिये’ और ‘वंशीवट सूना है’ आदि शामिल हैं। गोपाल दास नीरज ने कई प्रसिद्ध फ़िल्मों के गीतों की रचना भी की है। ‘पहचान’ फिल्म के गीत ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ और ‘मेरा नाम जोकर’ के ‘ए भाई ! ज़रा देख के चलो’ ने नीरज को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया।

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