मणिपुर की लोकटक झील में मिले ऐसे जीवाणु, जो बढ़ाएंगे फसलों की पैदावार

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नई दिल्‍ली। मणिपुर की प्रसिद्ध लोकटक झील दुनियाभर में अपने तैरते हुए द्वीपों के लिए जानी जाती है। यह उत्‍तर पूर्व भारत की सबसे बड़ी साफ पानी की झील है। इसे दुनिया की एकमात्र तैरती हुई झील के नाम से जाना जाता है क्‍योंकि यहां छोटे-छोटे भूखंड या द्वीप पानी में तैरते हैं। इन द्वीप को ‘फूमदी’ के नाम से जाना जाता है। ये फूमदी वनस्पतियों, मिट्टी और जैविक तत्वों से भरपूर हैं। अब भारतीय वैज्ञानिकों ने लोकटक झील तथा उसमें पाई जाने फूमदी में ऐसे कई जीवाणुओं का पता लगाया है, जो पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले रसायनों और औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण एंजाइमों के उत्पादन में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

शोध करने वाले वैज्ञानिक विश्वनाथ गाडगिल, कोमल साल्कर और डॉ. मिलिंद मोहन नायक

किसने की जीवाणुओं की खोज ?

गोवा विश्वविद्यालय, मणिपुर विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के जीव वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से यह अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों को लोकटक झील और उसकी फूमदियों में कई ऐसे जीवाणु मिले हैं, जो कई सारे एंजाइम का उत्पादन करते हैं। ये पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी उत्प्रेरक रसायनों का भी उत्पादन करते हैं। इनमें से कुछ जीवाणुओं में बीमारी पैदा करने वाले फंगस और सूक्ष्मजीवों के प्रति प्रतिरोधी गुण भी देखे गए हैं। इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं में गोवा विश्‍वविद्यालय के डॉ. मिलिंद मोहन नायक के अलावा कोमल साल्कर, विश्वनाथ गाडगिल, संतोष कुमार दुबे और राधारमण पांडे शामिल थे।

वैज्ञानिकों ने कैसे किया अध्‍ययन ?

शोधकर्ताओं ने लोकटक झील के पानी और फूमदी तलछटों से 26 जीवाणुओं को अलग किया और उसके बाद जीवाणुओं की एंजाइम की उत्पादन क्षमता, पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने और कवक-प्रतिरोधी गुणों की जांच की। अलग किए गए जीवाणुओं में से एंटीरोबेक्टर टेबेसी नामक जीवाणु साइडेरोफोर्स, इंडोल एसिडिक एसिड, फॉस्फेट्स और कार्बनिक अम्ल का उत्पादन करते हैं। माना जाता है कि ये अम्‍ल पौधों की वृद्धि में अहम भूमिका निभाते हैं। ये जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण, हाइड्रोजन सायनाइड उत्पादन, फॉस्फेट घुलनशीलता और अमोनिया उत्पादन जैसी पादप क्रियाओं में भी शामिल होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आर्द्रभूमियों में टिकाऊ खेती के लिए इन जीवाणुओं का उपयोग किया जा सकता है।

उर्वरक के रूप में इस्‍तेमाल होता है तलछट

इस शोध से जुड़े गोवा विश्वविद्यालय के सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक डॉ. मिलिंद मोहन नायक बताते हैं कि मणिपुर में किसान फूमदी तलछटों का उपयोग खेतों में उर्वरक के रूप में करते हैं। इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और फसल की पैदावार में इजाफा होता है। बता दें कि लोकटक झील और उसमें मौजूद फूमदियों में खास तरह के सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, इसकी पुष्टि पहले हो चुकी है। इसमें मौजूद सूक्ष्मजीव हाइड्रोलिटिक एंजाइमों का स्राव करके पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं। यही कारण है कि फूमदी में मौजूद जीवाणुओं के कारण खेतों की उर्वरता बढ़ जाती है।

फंफूद की वृद्धि रोकने में भी सक्षम

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार, यहां पाए जाने वाले कुछ जीवाणु पौधों में रोग पैदा करने वाली फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरियम नामक फंफूद की वृद्धि रोकने में सक्षम पाए गए हैं। इसके अलावा एरोमोनास हाइड्रोफिला नामक जीवाणुओं द्वारा औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण एंजाइमों, जैसे- एमाइलेज, लाइपेज, प्रोटिएज, सैल्युलेज और काइटिनेज मिलता है। इन एंजाइमों का उपयोग खाद बनाने में किया जाता है। इस तरह लोकटक झील में मौजूद सूक्ष्मजीव कृषि और औद्योगिक दृष्टि से बेहद उपयोगी हैं। यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘करंट साइंस’ में प्रकाशित किया गया है।

क्‍या है लोकटक झील की खासियत

  • इस झील का कुल क्षेत्रफल लगभग 280 वर्ग किलोमीटरर है। फुमदी का सबसे बड़ा भाग झील के दक्षिण पूर्व भाग में स्थित है, जो 40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • इस सबसे बड़े भाग में दुनिया के सबसे लंबा और एकमात्र तैरता हुआ पार्क भी है जिसका नाम ‘किबुल लामिआयो नेशनल पार्क’ (Keibul Lamjao National Park) है।
  • सिर्फ इस राष्ट्रीय उद्यान में ही दुर्लभ प्रजाति के संगाई हिरण पाए जाते हैं। इन्‍हें भौंकने वाले हिरण भी कहा जाता है।
  • मणिपुर के लोग मछली पकड़ने से लेकर कृषि, मत्स्य पालन, पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों के निर्माण और उसके व्यापार के लिए लोकटक झील और उसकी फूमदियों पर निर्भर हैं।
  • इस झील में पानी के पौधों की तकरीबन 233 प्रजातियां, पक्षियों की 100 से अधिक प्रजातियां रहती हैं। झील में जानवरों की 425 प्रजातियां भी हैं।

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