आजादी के बाद पहली बार ठाकुरों के इस गांव में घोड़ी पर पहुंचा कोई दलित दूल्हा

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  • कासगंज जिले के निजामपुर गांव में संगीनों के साए में निकली दलित संजय जाटव की बारात

कासगंज। छह महीने तक चली लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार दलित दूल्हे की घोड़े पर चढ़कर शादी के मंडप तक पहुंचने की मुराद पूरी हुई। कासगंज जिले के निजामपुर गांव में रविवार (15 जुलाई) को आजादी के बाद पहली बार एक दलित दूल्हे की बारात बाकायदा गांव की गलियों से होती हुई दुल्‍हन के दरवाजे पर पहुंची। इससे पहले इस गांव में किसी भी दलित की बारात नहीं चढ़ी थी। सैकड़ों की संख्‍या में पहुंचे बारातियों और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच शादी संपन्‍न हुई। सोमवार को दूल्‍हा अपनी दुल्‍हन के साथ बारात लेकर विदा हुआ।

क्‍या था मामला ?

दरअसल, इस साल जनवरी माह में गांव निजामपुर की शीतल की शादी हाथरस के सिकंदराराऊ के गांव बसई के रहने वाले अनुसूचित जाति के संजय जाटव (27)  से 20 अप्रैल को होनी तय हुई थी। इसी बीच प्रमाणपत्रों में लड़की को नाबालिग पाया गया तो उसके बालिग होने तक शादी को 15 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया था। संजय बताते हैं – ‘करीब 10-12 साल पहले मेरे ताऊ के लड़के की शादी भी इसी गांव में हुई थी, लेकिन दबंगों ने घोड़ी पर बरात नहीं जाने दी थी। जब मेरी शादी यहां तय हुई तो मैंने घोड़ी पर जाने की बात रखी। इसका गांव के ठाकुरों ने फिर विरोध किया और धमकी भी दी। उनका कहना था कि यह गांव की परंपरा नहीं है और बेवजह जिद पकड़ कर परंपरा तोड़ गांव में बारात घुमाने की बात की जा रही है।’ ऐसे में शादी को लेकर गांव में भारी विवाद और तनाव के हालात पैदा हो गए।

दुल्हन शीतल भी अपनी शादी को लेकर बेहद खुश दिखी

प्रशासन से लेकर हाईकोर्ट तक लगाई गुहार

इस मामले को लेकर दलित युवक संजय ने पुलिस प्रशासन से लेकर हाईकोर्ट तक गुहार लगाई। आखिरकार छह महीने तक चले विवाद और जद्दोजहद के बाद 8 अप्रैल को प्रशासन ने तय किया कि पुलिस की मौजूदगी में बारात निकाली जाए। इस तरह कासगंज जिले के निजामपुर गांव में रविवार को पहली बार पुलिस की कड़ी सुरक्षा में एक दलित दूल्हे की बारात बाकायदा गांव की गलियों में घूमते हुए लड़की के दरवाजे पहुंची।

150 से ज्‍यादा पुलिसकर्मी थे तैनात

संजय की शादी बिना किसी बाधा के संपन्‍न कराने के लिए गांव में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे गांव में पुलिस के अलावा पीएसी कांस्टेबलों को भी तैनात किया गया था। जिस रास्ते से बारात गुजरी, उस रास्ते में छतों पर भी पुलिसकर्मी तैनात थे। एडीएम, एएसपी, एसडीएम सहित तमाम अधिकारी भी शादी पूरी होने तक मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि दुल्हन की विदाई के बाद भी शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए कई दिनों तक बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहेंगे। प्रशासन पहले ही 37 लोगों के खिलाफ पाबंदी की कार्रवाई कर उनसे मुचलका भरवा चुका था। पाबंद हुए लोग शादी के दिन गांव से चले गए थे।

गांव में उत्सव का माहौल 

पुलिस छावनी बने गांव में रविवार को उत्सव जैसा माहौल था। ढोलक की थाप पर मंगल गीत गाए जा रहे थे। गांव के बाहर स्वागत द्वार बनाया गया था। दलित समाज के लोगों ने बारात का जोरदार स्वागत किया। इसके बाद बैंड-बाजों के साथ बारात की चढ़ाई शुरू हुई। घोड़ाबग्घी पर सवार दूल्हा संजय बारात के साथ चल रहा था। उसके आगे बैंड-बाजों की धुनों पर बाराती नाचते हुए चल रहे थे। उधर, दुल्हन शीतल भी अपनी शादी को लेकर बेहद खुश है। शीतल ने बताया, ‘गांव में पहली बार उसका दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर आया, यह उसके लिए खुशी की बात है। हालांकि शीतल की खुशी में कहीं न कहीं एक डर भी छिपा है। उसने आशंका जताई कि ऐसा न हो कि उसकी विदाई के बाद उसके घरवालों को परेशान किया जाए।’

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