केंद्र को SC की फटकार, कहा – ‘ताजमहल को सहेज नहीं सकते तो गिरा दें’

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल के संरक्षण को लेकर उठाए गए कदमों को लेकर केंद्र, उप्र सरकार तथा उसके प्राधिकारियों को बुधवार (11 जुलाई) को आड़े हाथों लिया। अदालत ने कहा कि मुगलकाल की इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण को लेकर कोई उम्मीद नजर नहीं आती है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उत्तर प्रदेश सरकार ताजमहल की सुरक्षा और उसके संरक्षण को लेकर दृष्टिपत्र लाने में विफल रही है। कोर्ट ने कहा कि 31 जुलाई से वह इस मामले पर प्रतिदिन सुनवाई करेगी।

क्‍या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?

जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘अगर आप (सरकार) ताज को सहेज नहीं सकते तो इसे बंद कर सकते हैं। आप चाहें तो इसे ध्वस्त कर सकते हैं और यदि आपने पहले से ही फैसला कर रखा है तो इससे छुटकारा पा सकते हैं।’ साथ ही कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि ताजमहल के संरक्षण को लेकर क्या कदम उठाए गए और किस तरह की कार्रवाई की जरूरत है, इस बारे में वह विस्तृत जानकारी पेश करे। पीठ ने कहा कि ताजमहल के संरक्षण के बारे में संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

यूपी सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा है कि ताजमहल के आसपास उद्योगों को बढ़ाने के लिए अनुमति क्‍यों दी गई?  कोर्ट ने पेरिस के ऐफिल टॉवर का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वहां से सीखे कि ऐतिहासिक इमारतों को कैसे सहेजा जाता है। कोर्ट ने कहा, ‘आप लोग ताजमहल को लेकर गंभीर नहीं हैं और न ही आपको इसकी परवाह है। हमारा ताज ज्यादा खूबसूरत है और आप टूरिस्ट को लेकर गंभीर नहीं हैं। यह देश का नुकसान है।’ सुप्रीम कोर्ट ने फिर सवाल उठाया कि ‘टीटीजेड (ताज ट्रैपेजियम जोन) एरिया में उद्योग लगाने के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं और उनके आवेदन पर विचार हो रहा है। ये आदेशों का उल्लंघन है।’

क्‍या कहा केंद्र सरकार ने ?

केंद्र सरकार की ओर से पीठ को बताया गया कि आईआईटी, कानपुर ताजमहल और उसके आसपास वायु प्रदूषण के स्तर का आकलन कर रहा है और चार महीने में अपनी रिपोर्ट देगा। केंद्र ने यह भी बताया कि ताजमहल और उसके इर्द-गिर्द प्रदूषण के स्रोत का पता लगाने के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है जो इस विश्व प्रसिद्ध स्मारक के संरक्षण के उपाय सुझाएगी।

नमाज की इजाजत देने से किया इनकार

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो लोग आगरा के निवासी नहीं है, उन्हें शुक्रवार को ताजमहल परिसर के भीतर स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं होगी। बता दें कि आगरा प्रशासन ने 24 जनवरी, 2018  को ताजमहल की सुरक्षा के मद्देनजर इसमें स्थित मस्जिद में बाहरी व्यक्तियों के नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। ताजमहल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह स्मारक दुनिया के सात अजूबों में शामिल है और इसे बर्बाद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आगरा में कई मस्जिदें हैं और गैर निवासी वहां नमाज पढ़ सकते हैं।

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