बोहरा समाज में खतना पर SC सख्त, कहा- लड़की के निजी अंग छूना अपराध

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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 जुलाई) को मुस्लिमों के बोहरा समाज में खतना प्रथा पर सख्‍त टिप्पणी की है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर महिला के शरीर के निजी अंग को धर्म से क्यों जोड़ा जा रहा है ? बता दें कि सुनीता तिवारी ने महिलाओं में हलाला और खतना जैसी प्रथा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस केस की पैरवी वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह कर रही हैं।

क्‍या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सिंह की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘इस तरह की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ पॉस्को एक्ट है, जिसमें नाबालिग उम्र की लड़कियों के निजी अंगों को छूना अपराध है।’ सुनवाई के दौरान वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि जिस भी लड़की का खतना किया जाता है, वो बड़ी होने तक इस सदमे के साथ जीती है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने किया बचाव

इस मामले में दाउदी बोहरा वीमेंस एसोसिएशन फॉर रिलिजिएस फ्रीडम की ओर से कोर्ट में पेश होकर सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस्लाम धर्म में हजारों वर्षों से खफ्द और खतना जैसी प्रथा चली आ रही है। इसमें लड़की के निजी अंग का बहुत ही छोटा सा हिस्‍सा काटा जाता है, जो नुकसानदायक नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यह मुस्लिम पुरुषों की ही तरह की परंपरा है।

क्‍या बोले अटॉर्नी जनरल ?

सुनवाई के दौरान इस मसले पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि पुरुषों में निजी अंगों का खतना करने के कुछ लाभ हैं। मसलन, इससे एचआईवी फैलने का खतरा कम होता है, लेकिन महिलाओं का खतना हर हाल में बंद होना चाहिए, क्योंकि इसके काफी दुष्परिणाम हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और अफ्रीका के 27 देशों में इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।

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