आप जानते हैं ? आलू चिप्स देखकर मुंह में क्यों आ जाता है पानी

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नई दिल्‍ली। अगर आपसे पूछा जाए कि मां के दूध और आलू के चिप्स के बीच क्या संबंध है, तो ज्यादातर लोग इसकी जानकारी से इनकार करेंगे और कुछ लोग कहेंगे कि कोई संबंध नहीं है। लेकिन वैज्ञानिकों ने एक शोध में इन दोनों के बीच एक अनोखे संबंध की खोज की है। उनका कहना है कि इन दोनों के तार इंसान की स्मृति से जुड़ते हैं। 

किसने किया शोध ?

यह शोध जर्मनी के वैज्ञानिकों ने किया है। जर्मनी के कोलोन शहर के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर मेटाबॉलिज्म रिसर्च के वैज्ञानिकों ने शोध के बाद यह निष्‍कर्ष निकाला है। वैसे तो चिप्स या जंक फूड खाना इंसान की सेहत के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद लोग चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, आलू के पकौड़े,  केक की तरफ खिंचे चले आते हैं। मैक्‍स प्‍लांक इंस्‍टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ऐसा क्यों होता है, इसका कारण जानने की कोशिश की है।

सिर्फ मां के दूध में फैट और कार्बोहाइड्रेट

प्रकृति से मिलने वाले ज्यादातर खाद्य पदार्थों में ऐसी कोई भी चीज नहीं जो पूरी तरह फैट और कार्बोहाइड्रेट से भरी हो। आलू, गेंहू, मक्का या धान जैसी चीजों में कार्बोहाइड्रेट तो बहुत होता है लेकिन फैट नहीं होता। वहीं बीजों में फैट बहुत होता है लेकिन कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है। सिर्फ एक ही प्राकृतिक आहार है जिसमें ये दोनों पोषक तत्व भरपूर होते हैं और वह है मां का दूध। बच्‍चा जब मां का दूध पीता है तो इस जानकारी को अपने मस्तिष्‍क में स्‍टोर कर लेता है।

क्‍या निकला शोध में ?

मैक्‍स प्‍लांक इंस्‍टीट्यूट के वैज्ञानिकों के मुताबिक, मां के दूध में मौजूद फैट और कार्बोहाइड्रेट की जानकारी उम्र बढ़ने के बाद भी हमारे मस्तिष्क में स्टोर रहती है। उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क को पता रहता है कि तेज पोषण के लिए फैट और कार्बोहाइड्रेट का एक साथ मिलना बहुत जरूरी है। बड़े होने के बाद जब हम चिप्स या जंक फूड खाते हैं तो दिमाग फिर से सक्रिय हो जाता है और इस तरह के आहार को मां के दूध की तरह सुपर फूड की श्रेणी में रख देता है। वैज्ञानिक शोधों में पता चला है कि चिप्‍स या जंक फूड वसा और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं, इसीलिए जब ये चीजें सामने आती हैं तो मुंह में पानी आने लगता है।

लेकिन चिप्‍स से दूरी ही बेहतर

हालांकि जर्मन वैज्ञानिकों का कहना है कि स्मृति का यही खेल आज मोटापे की समस्या पैदा कर रहा है। बहुत ज्यादा फैट और कार्बोहाइड्रेट वाले आहार से टाइप 2 डाइबिटीज का खतरा होता है। मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि चिप्स से दूरी बनाए रखना ही बेहतर है क्योंकि जबतक इसका पूरा पैकेट खत्‍म नहीं हो जाता है, हमारा दिमाग हमें एक और, एक और करके उकसाता रहता है।

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