6 साल बाद निर्भया को इंसाफ, चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार

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नई दिल्ली। 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार में चार्टर्ड बस में निर्भया से गैंगरेप और बर्बरता करने वाले दोषियों विनय शर्मा, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर की फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है। इन सभी ने कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था। इस पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

निचली अदालत से अब तक सजा बरकरार
इस मामले के चारों दोषियों को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने मौत की सजा की पुष्टि की थी। इसके खिलाफ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली थी। इसके बाद उन्होंने रिव्यू पिटीशन दाखिल की। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।

बचाव पक्ष के वकील ने ये कहा
बचाव पक्ष के वकीलों के मुताबिक रेप के वक्त दो दोषी नाबालिग थे। उनका कहना था कि एक की उम्र उस वक्त 16 साल और दूसरे की 17 साल थी। ऐसे में उन्हें नाबालिग होने का फायदा मिलना चाहिए था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
 
अब क्या बचा है रास्ता ?
चारों दोषियों के पास अब राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाने का रास्ता ही बचा है। इस गुहार पर राष्ट्रपति केंद्रीय गृह मंत्रालय से राय लेने के बाद दोषियों की सजा घटाने या उनकी फांसी की सजा बरकरार रखने का फैसला लेते हैं।

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निर्भया के माता-पिता ने जताई खुशी
निर्भया की मां और पिता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई है। निर्भया की मां ने कहा कि वो खुश हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बेटी से हुई दरिंदगी के मामले में चारों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी है।
 
एक आरोपी की हो चुकी मौत, दूसरा था नाबालिग
बता दें कि इस मामले के एक अन्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। जबकि, निर्भया से सबसे ज्यादा दरिंदगी करने और उसके प्राइवेट पार्ट्स में लोहे की रॉड डालने वाले नाबालिग दोषी को 3 साल की सजा सुनाई गई थी। सजा काटने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था।

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