डॉन मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या, झांसी से रविवार को ही लाया गया था बागपत

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बागपत। खूंखार डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। उसे बीएसपी के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में सोमवार को पेशी के लिए एक दिन पहले ही झांसी जेल से लाया गया था। मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने बीते 29 जून को अपने पति की हत्या की आशंका जताते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी।

किसने की मुन्ना बजरंगी की हत्या ?
जेल अधिकारियों के मुताबिक जेल में ही कैद सुनील राठी नाम के बदमाश ने मुन्ना बजरंगी पर फायर कर दिया। गोली लगने से मुन्ना बजरंगी की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बजरंगी और सुनील को एक ही बैरक में रखा गया था। यूपी सरकार ने मुन्ना बजरंगी की हत्या की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। जेल में असलहा किस तरह पहुंचा, इसकी भी जांच की जा रही है।

मुख्तार अंसारी से थी अदावत
बता दें कि मुन्ना बजरंगी ने महज 17 साल की उम्र से ही जुर्म की दुनिया में कदम रख दिया था। उसने पहले मुख्तार अंसारी के गैंग से शुरुआत की थी, लेकिन बाद में अलग हो गया। बताया जाता है कि मुख्तार अंसारी से उसकी अदावत चल रही थी। बजरंगी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का भी आरोप था। उस पर कुल 20 लोगों की जान लेने का आरोप था। बजरंगी ने खुद माना था कि 40 साल के जुर्म के करियर में उसने 20 लोगों की जान ली।

1984 में की थी पहली हत्या
जौनपुर में पैदा हुए मुन्ना बजरंगी को हथियारों का शौक था। वह बड़ा गैंगस्टर बनना चाहता था। इस वजह से 5वीं के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह ने उसे संरक्षण दिया। इसके बाद 1984 में मुन्ना ने पहली हत्या की। जौनपुर के बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की हत्या भी उसी ने की थी।

मुख्तार के कहने पर कृष्णानंद राय की हत्या की
पूर्वांचल में डॉन मुख्तार अंसारी सरकारी ठेके और वसूली का धंधा करता था। बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय ने मुख्तार को चुनौती दी। कृष्णानंद के प्रभाव से मुख्तार को डर लगा और उसने मुन्ना बजरंगी को विधायक की हत्या की सुपारी दे दी। मुन्ना बजरंगी ने 29 नवंबर 2005 को कृष्णानंद राय की हत्या कर दी। हत्या में पहली बार एके-47 का इस्तेमाल हुआ।

7 लाख का था इनामी
मुन्ना बजरंगी पर 7 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। मुन्ना बजरंगी इसके बाद भागकर मुंबई चला गया और कई साल रहा। बीच में विदेश भी जाता रहा। गाजीपुर लोकसभा सीट से डमी उम्मीदवार उसने खड़ा करने की कोशिश की। यूपी समेत कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे। 29अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया। तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा था। इस दौरान उसके जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे मामले भी सामने आते रहे।

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