राष्ट्रपति भवन का किचन देख खुद की आखों पर यकीन नहीं कर पाएंगे आप

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नई दिल्‍ली। पूरी दुनिया में भारत अपनी मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले हर बड़े देश के राष्ट्राध्यक्ष को सम्मान में राष्ट्रपति भवन में भोज के लिए आमंत्रित किया जाता है और उनका भव्‍य स्वागत किया जाता है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

राष्ट्रपति भवन की खासियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां 340 कमरे हैं और यह तीन लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। राष्ट्रपति भवन में सबसे खास है यहां का किचन, जहां पर विदेशी मेहमानों के लिए खाना तैयार किया जाता है। इसे एडविन लुटियन ने करीब 90 साल पहले बनाया था।

राष्ट्रपति भवन में दो किचन हैं – एक राष्ट्रपति का निजी किचन और दूसरा राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए खाना बनाने का किचन। पहला किचन छोटा है, लेकिन दूसरा किचन देखकर आपको खुद की आंखों पर यकीन नहीं होगा। इस किचन के आगे पांच सितारा होटलों के किचन कुछ भी नहीं हैं। इस किचन में आपको सारी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

इस समय मॉन्टी सैनी राष्ट्रपति भवन की इस किचन के हेड हैं। वह 45 लोगों की किचन टीम को लीड करते हैं। कुछ समय पहले जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के वेलकम में यहां भोज दिया गया था, तब मॉन्टी के खाने की काफी प्रशंसा की गई थी।

राष्ट्रपति भवन के इस किचन के कई सेक्शन हैं, जिसमें मुख्य किचन,  बेकर्स,  हलवाई, कॉन्टिनेटल और ट्रेनिंग एरिया शामिल हैं। ये पूरी तरह वातानुकूलित है। इसकी सफाई के लिए भी एक खास टीम है, जो हाईजीन के उच्च मानदंडों के अनुसार किचन को हमेशा साफ रखती है. ।ही किचन राष्ट्रपति भवन के सभी आधिकारिक समारोहों, मीटिंग्स, रिसेप्शन और कॉन्फ्रेंस में खान-पान की जिम्मेदारी संभालता है।

भारत की समोसा और कचौड़ी की जितनी तारीफ की जाए कम है, लेकिन राष्ट्रपति भवन के रसोई के समोसे और कचौड़ियों की बात ही निराली है।यहां परोसे जाने वाले अवधी व्यंजनों का जायका भी बेहतरीन रहता है। यहां सभी व्यंजन अलग-अलग कार्यक्रमों और उनकी प्रकृति  और  आने वाले मेहमानों की पसंद के हिसाब से तैयार किये जाते हैं। जिस देश के मेहमान आ रहे होते हैं,  वहां के व्यंजनों को भी भारतीय और कॉन्टिनेंटल व्यंजनों के साथ परोसने की कोशिश की जाती है। हालांकि यह अलग बात है कि मेहमानों कॉन्टिनेंटल खाने के आगे भारतीय व्यंजन काफी भाता है।

80 के दशक में आधुनिक किचन की हुई शुरुआत

आजादी के बाद भारत के पहले गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने मेहमानों की शानदार अगवानी की परंपरा को और आगे बढाया, लेकिन उस समय राष्ट्रपति किचन अंग्रेजी स्टाइल का था। जैसे-जैसे यहां भारत के राष्ट्रपतियों ने अपनी जगह ली, उन्होंने यहां के किचन में अपनी पसंद के अनुसार व्यंजनों की लिस्ट में फेरबदल किया। 80 के दशक में यहां किचन पूरी तरह आधुनिक होना शुरू हुआ।

राष्ट्रपति भवन में ही राष्ट्रपति का एक निजी किचन भी है, जिसमें राष्ट्रपति, उनके परिवार और मेहमानों के खाना बनता है। इस किचन का प्रमुख भी एग्जीक्यूटिव शेफ ही होता है। प्रणब मुखर्जी जब राष्ट्रपति थे तब उनके निजी किचन के मेन्‍यू में कई तरह के बंगाली व्यंजन और मिठाइयां जोड़ी गई थीं, क्योंकि वो उन्हें बहुत पसंद थीं।

आपको जानकार हैरानी होगी, लेकिन राष्ट्रपति भवन के किचन में बनने वाली सब्जियां और मसाले पूरी तरह से यहां के किचन गार्डन में ही उगाए जाते हैं। ये काफी बड़ा है। यहां अलग-अलग प्रकार और प्रजातियों की सब्जियां और हर्ब्स उगाए जाते हैं, ये पूरी तरह आर्गेनिक होते हैं।

हर काम समय पर

राष्ट्रपहाति भवन के किचन में रोजाना एक नई चुनौती होती है। यहां हर चीज का एक समय तय है  और  उससे एक मिनट भी इधर या उधर नहीं हुआ जा सकता।

यूं तैयार की जाती है खाने की टेबल

आपको बता दें कि राष्ट्रपति भवन में किसी भी भोजन से छह से आठ घंटे पहले टेबल तैयार कर ली जाती है, इसमें क्रॉकरी, टेबल पर फूलों की सजावट शामिल है। आमतौर पर ऐसे भोज में सूप,  वेज और नॉनवेज व्यंजनों की विविधता और कई तरह के डेजर्ट होते हैं। इसके बाद चाय, कॉफी का दौर चलता है। मेहमानों की विदाई के समय उन्हें पान और माउथ फ्रेशनर दिया जाता है। खाने के दौरान नौसेना का बैंड संगीत की धुनें बजाता है। इस संगीत का कंपोजिशन हिन्दी, अंग्रेजी और संबंधित देश के हिसाब से होता है।

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