सचिन ने वन डे मैचों में दो नई गेंदों के इस्तेमाल पर छेड़ी नई बहस

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नई दिल्ली। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही पांच मैचों की वनडे सीरीज में बन रहे धुआंधार रनों पर सभी को हैरानी हो रही है। इंग्लैंड ने सीरीज के तीसरे वनडे में 481 रन का भारी-भरकम स्कोर बनाकर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इसके बाद सीरीज के चौथे वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने एरोन फिंच और शॉन मार्श के शानदार शतकों की बदौलत 310 रन बनाए, जिसे इंग्लैंड ने जेसन के शानदार शतक की बदौलत 44.4 ओवर में ही हासिल कर लिया। गेंदबाजों की ऐसी पिटाई देख मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर चुप नहीं रह पाए और उन्होंने रात में करीब 2 बजे ट्वीट कर एक नई बहस छेड़ दी।

क्‍या कहा मास्‍टर ब्‍लास्‍टर ने ?

सचिन ने ट्वीट कर कहा, ‘वनडे क्रिकेट में 2 नई गेंदों का उपयोग तेज गेंदबाजों की बर्बादी का सटीक फॉर्मूला (परफेक्ट रेसिपी फॉर डिजास्टर) है। दोनों गेंदों को पुरानी होने के लिए पर्याप्त वक्त नहीं मिलता, जिससे वो रिवर्स स्विंग हो सकें। लंबे समय से हमने गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग कराते नहीं देखा, जो डेथ ओवरों का अहम हिस्सा होती थी।’

वकार ने भी किया समर्थन

सचिन के सवाल उठाते ही उन्हें चारों तरफ से समर्थन मिलने लगा। सचिन की बात का समर्थन करते हुए पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और दिग्गज तेज गेंदबाज वकार यूनुस ने ट्वीट कर कहा, ‘इसी वह से अब आक्रामक तेज गेंदबाज पैदा नहीं हो रहे हैं। वो सभी रक्षात्मक रवैया अपनाने लगे हैं। सचिन मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। रिवर्स स्विंग तो अब पूरी तरह विलुप्त हो गई है।’

सौरव ने भी उठाए थे सवाल

सचिन से पहले टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी वनडे क्रिकेट में रनों की बारिश पर सवाल उठाए थे। 19 जून को इंग्लैंड के 50 ओवर में 481/6 रन का स्कोर खड़ा करने के बाद गांगुली ने ट्वीट कर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा, ‘इंग्लैंड में 50 ओवर में लगभग 500 रन बनते देखना मुझे डरावना लग रहा है। ये खेल की सेहत के लिए ठीक नहीं है, पता नहीं यह कौन सी दिशा में जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का जो हाल हो रहा है वो स्वीकार्य नहीं है।’ इस मुद्दे पर सौरव ने उस दिन कई ट्वीट किए थे, हालांकि बाद में उन्‍हें डिलीट कर दिया था।

2011 से हो रहा दो नई गेंदों का इस्‍तेमाल

आईसीसी ने वनडे क्रिकेट में दोनों छोर से नई गेंद का इस्‍तेमाल अक्टूबर, 2011 में शुरू किया था। दरअसल, वनडे मैचों में सफेद गेंद पूरे 50 ओवर तक नहीं चल पाती थी। मैच के दौरान 30-40 ओवर के बीच उसे बदलना पड़ता था। आईसीसी ने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए दोनों छोर से अगल-अलग गेंद का उपयोग करने का नियम बनाया। हालांकि इसके बाद वनडे क्रिकेट में रिवर्स स्विंग की कला विलुप्त होती चली गई और पहले की अपेक्षा ज्यादा बड़े स्कोर बनने शुरू हो गए।

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