OMG : लिखित परीक्षा पास करेंगे तभी यूपी में बन पाएंगे कांग्रेस प्रवक्ता

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लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश कांग्रेस में गुरुवार को अजीबोगरीब घटना देखने को मिली। प्रदेश कांग्रेस दफ्तर पर कांग्रेस का प्रवक्ता बनने के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया। यह परीक्षा लेने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया संयोजक प्रियंका चतुर्वेदी और नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर रोहन गुप्ता प्रश्नपत्र ले दिल्‍ली से लेकर आए थे। 70 कैंडिडेट्स ने ये परीक्षा दी। लिखित परीक्षा के परिणामों के बाद उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग होगी।

राजीव गांधी के साथ काम करने वाले भी बैठे परीक्षा में

प्रवक्ताओं के लिए हुई इस परीक्षा में कांग्रेस के कई पुराने चेहरे भी शामिल हुए। इनमें अमरनाथ अग्रवाल, वीरेंद्र मदान, द्विजेंद्र त्रिपाठी, हिलाल नकवी सहित कई ऐसे नाम हैं जो कांग्रेस के काफी पुराने और जाने-पहचाने चहरे हैं। वीरेंद्र मदान तो राजीव गांधी के साथ काम कर चुके हैं, लेकिन उन्हें भी लिखित परीक्षा देनी पड़ी। हालांकि परीक्षा देने के बाद अमरनाथ अग्रवाल ने कहा कि यह अच्छा प्रयास है और कांग्रेस में हो रहे बदलाव को दिखाता है।

कांग्रेस प्रवक्ता परीक्षा में पूछे गए सवाल

कई कांग्रेसियों के छूटे पसीने

बता दें कि 20 जून को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने यूपी के मीडिया विभाग समेत अन्य विभागों को भंग कर दिया था। नए प्रवक्ताओं की तैनाती के लिए ही यह परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान कई कांग्रेसियों के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगीं, क्योंकि उन्‍हें ऐसी किसी परीक्षा की पहले से कोई सूचना नहीं थी। डेढ़ घंटे की इस परीक्षा में प्रश्नपत्र देखकर कई पूर्व प्रवक्ताओं और परीक्षा में शामिल होने वाले नेताओं के पसीने छूट गए।

सीक्रेट थी परीक्षा, लेकिन लीक हो गया पेपर

बताया जा रहा है कि कांग्रेस प्रवक्‍ताओं के लिए होने वाली यह परीक्षा सीक्रेट रखी गई थी, लेकिन बंटने से पहले ही सोशल मीडिया पर यह पर्चा लीक हो गया। परीक्षा देने वाले लोगों को परीक्षा शुरू होने से पहले ही पेपर वॉट्सऐप भी कर दिया गया, हालांकि ज्यादातर ने यह संदेश देखा ही नहीं।

जल्द जारी होगी प्रवक्ताओं की लिस्ट

परीक्षा और इंटरव्यू के बाद प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और कांग्रेस आलाकमान से राय मशविरा करने के बाद नए प्रदेश प्रक्ताओं की नई लिस्ट जारी की जाएगी। बहरहाल, कांग्रेसियों ने भले ही लिखित परीक्षा दे दी हो, लेकिन इस बात को लेकर उनके भीतर रोष है कि सीनियर और मंझे हुए नेताओं को भी ऐसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

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