स्विस बैंक में भारतीयों के बढ़े जमा धन पर राजनीतिक घमासान

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  • 2017 में स्विस नेशनल बैंक में भारतीयों के जमा धन में हुआ 50 फीसदी से अधिक का इजाफा

नई दिल्‍ली। पिछले साल स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का धन चार साल में पहली बार बढ़कर एक अरब स्विस फ्रैंक (7,000 करोड़ रुपए) के दायरे में पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 50 फीसदी ज्‍यादा है। ये आंकड़े स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों से सामने आए हैं। उधर, ये आंकड़े सामने आने के बाद देश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष अब केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ने पीएम मोदी को आड़े हाथ लिया है। 

कितना बढ़ा भारतीयों का धन ?

स्विस नेशनल बैंक (SNB) के सालाना आंकड़ों के अनुसार, स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.6 करोड़ फ्रैंक (लगभग 4500 करोड़ रुपये) रह गया था, लेकिन यह धनराशि 2017 में लगभग 6891 करोड़ रुपये (99.9 करोड़ फ्रेंक) हो गया। वहीं प्रतिनिधियों या धन प्रबंधकों के जरिए रखा गया धन इस दौरान 112 करोड़ रुपये (1.62 करोड़ फ्रैंक) रहा। भारतीयों के धन में ग्राहक जमाओं के रूप में 3200 करोड़ रुपये और अन्य बैंकों के जरिए 1050 करोड़ रुपये शामिल हैं। इस प्रकार इस धन में करीब 50% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी।

आंकड़े मोदी सरकार के लिए झटका !

एसएनबी के ये आंकड़े ऐसे समय में जारी किए गए हैं जब कुछ महीने पहले ही भारत व स्विटजरलैंड के बीच सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की एक नई व्यवस्था लागू हुई है। भ्रष्टाचार और कालेधन पर लगाम कसने के दावे करने वाली मोदी सरकार के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है। भारतीयों के जमाधन में ऐसे समय दिखी बढ़ोतरी हैरान करने वाली है जब भारत सरकार विदेशों में कालाधन रखने वालों के खिलाफ अभियान चलाए हुए है। इन आंकड़ों के बाद मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। यही नहीं, पार्टी के भीतर से भी इस पर निशाना साधा जा रहा है।

स्‍वामी ने वित्‍त मंत्रालय के अफसर पर बोला हमला

भाजपा सांसद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने इस मामले में एक बार फि‍र से वित्‍त मंत्रालय पर निशाना साधा है। उन्‍होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘वित्त सचिव अढिया के लिए एक बड़ी कामयाबी। एक तरफ पूरी दुनिया का स्विस बैंक में डिपॉजिट सिर्फ 3 फीसदी बढ़ा है, तो भारतीयों का 50 फीसदी बढ़ गया है। अढि‍या इससे भी ज्यादा मैनेज कर सकते थे, अगर राजेश्वर (ईडी अफसर) बीच में ना आते। स्‍वामी के इस हमले को फिर से वित्‍त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ हमला माना जा रहा है। वे पहले भी जेटली पर प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से हमला बोलते रहे हैं।

राहुल का तंज, क्या अब ये व्हाइट मनी है !

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘2014 में वह कहते थे, स्विस बैंक से ‘काला’ पैसा मैं लाऊंगा और सभी भारतीयों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा कराऊंगा। 2016 में भाषा बदल गई। उन्होंने कहा- नोटबंदी कालाधन को देश से खत्म कर देगा। 2018 में उन्होंने कहा- स्विस बैंकों में भारतीयों के ‘व्हाइट’ पैसों में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। स्विस बैंक में कालाधन नहीं है!’ उधर, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार स्विस बैंक में पैसा रखने वालों के नामों की सूची क्यों नहीं सार्वजनिक कर रही है? सरकार अब तो बता दे कि उसकी नाक के नीचे ये कालाधन स्विस बैंकों में किसने जमा किया?’

कालाधन पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दी सफाई

स्विस बैंक में भारतीयों के पैसे में बढ़ोतरी पर अभी वित्त मंत्रालय का कामकाज संभाल रहे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सफाई दी है। गोयल ने कहा,‘स्विस बैंक में जमा सारी रकम कालाधन नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले में कोई भी दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’उन्होंने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड में हुई द्विपक्षीय संधि के अनुसार स्विट्जरलैंड 1 जनवरी, 2018 से 31 दिसंबर, 2018 तक के भारतीयों के बैंक अकाउंट के आंकड़े उपलब्ध करवाएगा। आंकड़ा प्राप्त होने से पहले कैसे कहा जा सकता है कि वहां के बैंकों में जमा रकम कालाधन है या अवैध लेन-देन है। गोयल ने ये भी कहा कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) लागू की गई थी, जिसके तहत एक व्यक्ति को हर साल 2.50 लाख डॉलर बाहर भेजने की अनुमति दी गई थी। स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा रकम में जो बढ़ोतरी हुई है, उसका 40 फीसदी तो LRS के कारण है।

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