शोध : हजारों साल पहले मौजूद थी सिरेमिक बर्तन बनाने की उच्च तकनीक

230 0
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पुरातत्वविदों ने अध्ययन के बाद किया खुलासा

वाराणसी। हजारों साल पहले इस्‍तेमाल में आने वाले मिट्टी के काले रंग के चमकीले बर्तनों की उत्कृष्ट बनावट, उनकी चमक और तकनीक पुरातत्वविदों के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रही है। हाल ही में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पुरातत्वविदों ने एक अध्ययन किया है जिसमें इन बर्तनों को बनाने में उपयोग होने वाली उन्नत सिरेमिक तकनीक के बारे में कई महत्‍वपूर्ण तथ्यों का खुलासा किया गया है।

प्रो. विभा त्रिपाठी और पारुल सिंह

काले चमकीले मिट्टी के बर्तनों पर किया शोध

इस अध्ययन में 2000 ईसा पूर्व से 300-200 ईसा पूर्व के काले चमकीले मृदभाण्डों अर्थात ब्लैक स्लिप्ड वेयर में कार्बन के साथ-साथ मैग्नीशियम, एल्युमीनियम, सिलिकॉन, क्लोरीन, मैंग्नीज, सोडियम, टाइटेनियम और आयरन जैसे तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। वैसे तो खुदाई के दौरान प्रायः सभी ऐतिहासिक कालखंडों में उपयोग होने वाले मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं, लेकिन काले चमकीले मृदभाण्डों की ओर पुरात्वविदों का ध्यान कम ही गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए बीएचयू के पुरातत्व विभाग की प्रो. विभा त्रिपाठी और उनकी शोधार्थी पारुल सिंह ने काले चमकीले मिट्टी के बर्तनों पर गहन शोध किया है।

चार जगह से एकत्र किए नमूने

इन बर्तनों को बनाने की कला के बुनियादी स्वरूप और बनावट को समझने के लिए काले चमकदार मृदभाण्डों के नमूने विंध्य-गंगा क्षेत्र में स्थित चार स्थानों से एकत्रित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर का आगियाबीर, सोनभद्र में रायपुरा, चंदौली में लतीफ शाह और बलिया का खैराडीह शामिल हैं। इन नमूनों का एनर्जी-डिस्प्रेसिव एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी और स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के जरिये वैज्ञानिक परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया है।

दो तरह के मिले हैं काले मिट्टी के बर्तन

प्रो. विभा त्रिपाठी ने एक वेबसाइट से बातचीत में बताया – ‘खुदाई में दो तरह के काले चमकीले मिट्टी के बर्तन मिले हैं, एक नॉर्दर्न ब्लैक पॉलिश्ड वेयर और दूसरा ब्लैक स्लिप्ड वेयर। कई बार इन दोनों प्रकार के काले बर्तनों में अंतर कर पाना मुश्किल होता है, लेकिन गहन शोधों से पता चला है कि दोनों तरह के बर्तनों में मिट्टी के साथ मिलाए जाने वाले तत्वों की मात्रा में अंतर होता है।’

लौहयुग के मिट्टी के बर्तन ज्‍यादा बेहतर

शोधकर्ताओं का मानना है कि पूर्व-लौह युग की तुलना में लौहयुग के मिट्टी के बर्तन अधिक बेहतर हुआ करते थे क्योंकि उस समय तक लोहा गलाने के लिए भट्ठियों का इस्‍तेमाल होने लगा था। पुरातत्वविदों का अनुमान है कि इसी तकनीक का उपयोग कुम्हार काले चमकीले मिट्टी बर्तन बनाने के लिए भट्ठियों में लगभग 900-950 डिग्री सेल्सियस तक उच्च तापमान उत्पन्न करने में करते रहे होंगे।

खुदाई में मिले हैं कई तरह के मिट्टी के बर्तन

प्रो. त्रिपाठी के मुताबिक, ‘पूरे भारत में मिट्टी के बर्तनों के विभिन्न स्वरूप दिखाई देते हैं। इनमें नव पाषाणकाल के हाथ के बने मिट्टी के बर्तन, महाश्मकाल और हड़प्पाकालीन मिट्टी के बर्तन शामिल हैं। इनके अलावा कुछ विशिष्ट प्रकार के मृदभाण्ड भी पाए गए हैं, जिनमें काले चमकीले मृदभाण्ड, चित्रित धूसर मृदभाण्ड और गेरू चित्रित मृदभाण्ड आदि शामिल हैं। इन मृदभाण्डों का मिलना उस समय के मृदभाण्ड बनाने की कला एवं उनकी विविधिता को दर्शाता है।’ शोध से पता चलता है कि काले चमकीले मिट्टी के बर्तन उत्तर में मांडा (जम्मू-कश्मीर) से लेकर दक्षिण में पुदुरु (नेल्लोर, आंध्र प्रदेश) और पश्चिम में राजस्थान के बीकानेर से लेकर पूर्व में महास्थानगढ़ (बांग्लादेश) तक उपयोग किए जाते थे।

इन बर्तनों पर और वैज्ञानिक अध्‍ययन जरूरी

काले चमकीले मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों का हजारों साल बाद भी उसी चमक के साथ बने रहना, उस समय की खास और उत्कृष्ट सिरेमिक तकनीक को दर्शाता है। हालांकि, इनको चमकीला बनाने में किस पदार्थ का इस्‍तेमाल होता था, इसके बारे में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। इन बर्तनों में मिलने वाले विभिन्‍न पदार्थों की क्या भूमिका होती है, यह वैज्ञानिक शोध का विषय हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर इन तथ्यों को केंद्र में रखकर वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएं तो उच्च गुणवत्ता वाले सिरेमिक उत्पादों की कला और उत्पादन के पुनरुत्थान में मदद मिल सकती है।

Related Post

गुजरात चुनाव की तारीख के ऐलान में देरी पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

Posted by - October 23, 2017 0
गुजरात में चुनाव तारीखों के ऐलान में देरी को लेकर कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. कांग्रेस पार्टी ने…

शोपियां फायरिंग : पुलिस केस के जवाब में सेना ने भी दर्ज कराई एफआईआर

Posted by - January 31, 2018 0
सेना का दावा – हमलावर भीड़ के हाथों जवानों के घायल होने के बाद आत्मरक्षा में चलाई गई थी गोली श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर…

अकेला महसूस करने वाले लोग Fb पर रहते हैं ज्यादा एक्टिव, बुजुर्गों से भी ज्यादा तन्हा हैं युवा

Posted by - October 5, 2018 0
मैनचेस्टर (ब्रिटेन)। अगर हम ये सोचते हैं कि दुनिया में बुजुर्ग सबसे ज्यादा अकेले हैं तो हम गलत हैं। यूनिवर्सिटी…

इन देशों में जानवरों से सेक्स करते हैं लोग, फीस देकर जानवरों से बनाते हैं संबंध

Posted by - July 30, 2018 0
नई दिल्ली। हरियाणा के मेवात इलाके के नूंह में 8 लोगों पर प्रेग्नेंट बकरी से गैंगरेप करने का आरोप लगा…

क़रीब चार साल बाद जेल से बाहर आए तलवार दंपति

Posted by - October 17, 2017 0
डासना/गाज़ियाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा आरुषि-हेमराज दोहरे हत्याकांड में दोषमुक्त ठहराए गए दंत चिकित्सक दंपति राजेश और नूपुर तलवार सोमवार को…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *