उत्तर भारत पहुंचने वाला है मॉनसून, लेकिन एल-नीनो के असर से कम होगी बारिश

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नई दिल्ली। करीब 11 दिन तक मध्य भारत से नीचे रुकी मॉनसूनी हवाओं ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून ने मध्य भारत में दस्तक दे दी है और 29 जून से 1 जुलाई के बीच ये पूरे उत्तर भारत पर छा जाएगा, लेकिन मॉनसून पर एल-नीनो का असर पड़ने की आशंका भी उतनी ही बढ़ गई है। एल-नीनो मौसम से जुड़ा एक ऐसा प्रभाव है, जिससे बारिश कम होती है।

प्री-मॉनसून बारिश मंगल या बुधवार से संभव
मौसम विभाग के मुताबिक, फिलहाल मॉनसून मध्य प्रदेश से बढ़कर गुजरात में पहुंच गया है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके असर से उत्तर भारत में मंगलवार या बुधवार से प्री-मॉनसून की बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग कह रहा है कि बीच जुलाई तक मॉनसून पूरे देश पर छा जाएगा।

जुलाई में होगी अच्छी बारिश, अगस्त से कम
मॉनसून ने इस बार तय दिन से पहले केरल में दस्तक दी थी। तब कहा जा रहा था कि इस बार इंद्रदेव भारत पर प्रसन्न हैं। मौसम विभाग ने कहा था कि इस बार 101 फीसदी बारिश होगी, लेकिन अब विभाग के साथ ही मौसम पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि एल-नीनो प्रभाव से अगस्त और सितंबर में बारिश कम होगी।

क्या होता है एल-नीनो ?
भारत में मॉनसून पर महासागरों और समुद्र के तापमान का असर पड़ता है। जब प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर का तापमान बढ़ जाता है, तो उसे एल-नीनो कहते हैं। एल-नीनो का स्पेनिश भाषा में मतलब होता है ‘छोटा बच्चा’। एल-नीनो के असर से मॉनसूनी हवाओं में आर्द्रता की कमी हो जाती है और बारिश कम होती है। वहीं, महासागरों और समुद्र के ठंडा होने को ला-नीना प्रभाव कहते हैं। ला-नीना प्रभाव के सक्रिय होने पर अच्छी मॉनसूनी बारिश होती है।

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