वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा पत्ता, जो 100 गुना ज्यादा छोड़ेगा ऑक्सीजन

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कोलकाता। कंक्रीट के जंगल यानी बिल्डिंगों की बढ़ती संख्या के साथ ही भारत के अलावा दुनिया से हरियाली खत्म होती जा  रही है। अंधाधुंध पेड़ों की कटान हो रही है और बहुमंजिला बिल्डिंग खड़ी की जा रही हैं। पेड़ों की इस कटान की वजह से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है और धरती पर गरमी बढ़ रही है। इस बड़ी चुनौती को देखते हुए धरती को बचाने की खातिर बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISC)  के 5 छात्रों ने ऐसी चीज बनाई है, जिससे पेड़ों के कटने के बावजूद पर्यावरण को बड़ा सहारा मिलने जा रहा है।

IISC के छात्रों ने क्या चीज है बनाई ?
आईआईएससी में पढ़ रहे पश्चिम बंगाल के लाबपुर के विश्वजीत भट्टाचार्य, खड़गपुर के शांतनु मुखर्जी, रामपुर हाट के अमित कुमार सिमलांदी, हावड़ा के अरुणाभ चक्रवर्ती और तमिलनाडु के रिसर्च स्कॉलर गुरुप्रतीप ने कोलकाता के मूल निवासी और आईआईएससी में प्रोफेसर अंशु पांडेय के नेतृत्व में शोध करके कृत्रिम पत्ता बनाने में सफलता हासिल की है। इन सभी ने द क्वांटम लीफ फॉर आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस पर शोध किया।

ऐसे बनाया कृत्रिम पत्‍ता
शोधकर्ताओं ने तांबा, अल्यूमिनियम, सल्फेट और जिंक सल्फाइड से कृत्रिम पत्ता तैयार किया है। उनके मुताबिक, पेड़ों के पत्ते सूरज की रोशनी से लाल और नीले रंग की किरणों को सोखकर फोटोसिंथेसिस की मदद से खाना बनाते हैं और इस दौरान कार्बन डाइ ऑक्साइड लेकर भरपूर ऑक्सीजन देते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, सूरज की रोशनी में हरे रंग की किरणें बहुत ज्यादा होती हैं, लेकिन पत्ते हरी किरणों का इस्तेमाल नहीं कर पाते। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने जो कृत्रिम पत्ता तैयार किया है, वो इन्हीं हरी किरणों की मदद से फोटोसिंथेसिस करने में सक्षम हैं।

100 गुना ज्यादा मिलेगा ऑक्सीजन !
शोध करने वाले ये दावा भी कर रहे हैं कि जो कृत्रिम पत्ते उन्होंने बनाए हैं, वो पेड़ के पत्तों के मुकाबले 100 गुना ज्यादा ऑक्सीजन देंगे। उनका कहना है कि कृत्रिम पत्ते कार्बन डाइ ऑक्साइड लेंगे, जिसके बाद उसे बायो कार्बोनेट में बदलेंगे और इस प्रक्रिया में भरपूर ऑक्सीजन मिलेगी। ये शोध अमेरिकन केमिकल सोसायटी नाम के जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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