सावधान, डिप्रेशन की बड़ी वजह बन रहा है सोशल मीडिया !

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  • अमेरिका के पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय के शोध में खुलासा – सोशल मीडिया के कारण लोग हो रहे बीमार

न्यूयॉर्क। इंटरनेट के इस जमाने में आज हर कोई सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है। लोग अपना ढेर सारा समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं। अपने दोस्तों के साथ लाइफ के सभी खास पल शेयर करते हैं। लेकिन हाल ही में हुए एक रिसर्च में चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इसमें खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया पर सकारात्मक बातचीत की तुलना में नकारात्मक अनुभव ज्यादा असर डालते हैं,  जो डिप्रेशन के लक्षण पैदा करते हैं इसलिए इनसे सावधान रहने की जरूरत है।  

किसने किया रिसर्च ?

सोशल मीडिया के प्रभावों पर यह शोध अमेरिका के पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय ने किया है। इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने 1,179 पूर्णकालिक छात्रों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल व अनुभव का सर्वेक्षण किया। इन छात्रों की आयु 18 से 30 के बीच थी। प्रतिभागियों ने अवसाद वाले लक्षणों के आकलन के लिए एक प्रश्नावली भी भरी। शोध के निष्कर्षों का प्रकाशन ‘डिप्रेशन एंड एंग्‍जाइटी’ पत्रिका में किया गया है।



क्‍या कहते हैं शोध के नतीजे ?

अमेरिका के पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय के ब्रायन प्रिमैक ने कहा,  ‘हमने पाया है कि सोशल मीडिया के सकारात्मक अनुभव, बहुत आंशिक रूप से कम अवसाद वाले लक्षणों से जुड़े हैं, लेकिन इसके विपरीत नकारात्मक अनुभव मजबूती से या लगातार उच्च अवसाद के लक्षणों से जुड़े हैं।’ शोधकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया पर सकारात्मक अनुभव में हर 10 फीसदी की बढ़ोतरी अवसाद के लक्षणों में 4 फीसदी की कमी करती है,  लेकिन ये परिणाम सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं हैं। इसके विपरीत हर 10 फीसदी नकारात्मक अनुभव में वृद्धि 20 फीसदी अवसाद लक्षणों में वृद्धि से जुड़ी हुई है  और यह एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय निष्कर्ष है।



सामाजिक और पारिवारिक संबंध भी हो रहे प्रभावित

वर्ष 2017 में दुनिया के 18 देशों में Social Media पर समय बिताने वाले लोगों पर एक सर्वे किया गया था। इस सर्वे में 23 प्रतिशत लोगों ने माना था कि सोशल मीडिया की वजह से उनकी और उनके जीवनसाथी के बीच होने वाली बातचीत कम हो गई है, जबकि 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि Social Sites पर लगातार एक्टिव रहने के कारण वो अपने बच्चों से बहुत कम बात करते हैं। 23 प्रतिशत का कहना था कि इस आदत की वजह से वो अपने माता-पिता से कम बातचीत करते हैं। 69 प्रतिशत युवाओं का कहना था उनका अपने दोस्तों से संवाद कम हो गया है क्योंकि वो सोशल मीडिया के ज़रिए ही उनका हालचाल पूछ लेते हैं। यही नहीं, फेसबुक के एक पूर्व प्रेसिडेंट ने एक सेमिनार के दौरान कहा था – ‘सोशल मीडिया समाज को तोड़ने का काम कर रहा है और उन्हें इस बात का अफ़सोस है कि फेसबुक को तैयार करने में उनकी भी भूमिका थी।’

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