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96 साल की इस महिला ने लिया पढ़ाई का संकल्प, चौथी कक्षा में लेंगी एडमिशन

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  • केरल की  कर्थयायनी अम्मा  ने किया 10वीं तक पढ़ने का फैसला, 12 साल की उम्र में छोड़ दी थी पढ़ाई

अलप्पूझा। कहा गया है कि पढ़ने या सीखने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सही साबित किया है केरल के अलप्पूझा जिले की रहने वाली 96 साल की कर्थयायनी अम्मा ने। उन्‍होंने 12 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन अब अपनी बेटी से प्रेरणा लेकर उन्‍होंने दोबारा पढ़ाई करने की ठानी है। साक्षरता मिशन के तहत वे फोर्थ ग्रेड में एडमिशन ले रही हैं। उन्होंने 10वीं क्लास तक पढ़ने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि वे सबसे उम्रदराज स्टूडेंट हैं।

अभी अम्मा मलयालम के अक्षर लिखना सीख रही हैं

अंग्रेजी पढ़ना भी सीखेंगी अम्मा

स्‍थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,  इसी साल जनवरी महीने में चेप्पड ग्राम पंचायत की साक्षरता टीम बुजुर्गों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए लक्षम वेदु कॉलोनी गई थी। साक्षरता मिशन के तहत वहां के ज्‍यादातर बुजुर्गों ने पढ़ाई करने से किनारा कर लिया, लेकिन कर्थयायनी अम्मा पढ़ाई के लिए तैयार हो गईं। साक्षरता टीम भी बड़े ही लगन से अम्‍मा को पढ़ाने में जुट गई है। अभी अम्मा को गणित पढ़ाई जा रही है और वे पहाड़ा याद कर रही हैं। इसके साथा ही वो मलयालम के अक्षर पढ़ना भी सीख रही हैं। अम्‍मा की इच्‍छा अंग्रेजी पढ़ने की भी है, जिसे उनके कोर्स में शामिल किया जा रहा है।

बेटी से मिली पढ़ने की प्रेरणा

अम्मा बताती हैं कि कुछ साल उनके अंदर पढ़ाई करने का शौक उस समय पैदा हुआ, जब उन्होंने अपनी बेटी अम्मिनी अम्मा को पढ़ते देखा। अम्मा की बेटी ने भी 60 साल की उम्र में साक्षरता मिशन का कोर्स पास किया है। ये कोर्स 10वीं के पारंपरिक कोर्स के बराबर है। अम्मा के पढ़ाई के फैसले के बाद 30  और बुजुर्गों ने इस कोर्स के लिए अपना नाम लिखाया है। बता दें कि कर्थयायनी अम्मा के पिता पेशे से ट्यूटर थे, लेकिन इसके बावजूद उन्‍होंने और उनकी बहन ने 12 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।

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