OMG : इस इंजीनियर ने आम के पेड़ पर बना लिया चार मंजिला घर !

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उदयपुर। राजस्थान में झीलों की नगरी के नाम से मशहूर उदयपुर में एक इंजीनियर ने ऐसा घर बनाया है,  जो लोगों के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है। इंजीनियर ने अपना यह घर एक पेड़ पर बनाया है और वो भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि चार मंजिला। जी हां, उदयपुर के चित्रकूट नगर में रहने वाले सिविल इंजीनियर केपी सिंह ने बिना पेड़ को काटे घर बनाकर यह कारनामा किया है। उन्‍होंने 18 साल पहले अपने इस सपनों के घर की कल्पना की थी।

इंजीनियर केपी सिंह का सपना था ऐसा घर

केपी सिंह की ख्वाहिश थी कि वो एक ऐसा घर बनाएं जो प्रकृति के बीच हो और उनके घर-आंगन में पेड़ की छांव हो। शुद्ध ताजी हवा पेड़ों की पत्तियों से छनकर खिड़की और दरवाजों से होते हुए घर में आए। अपने सपने को साकार करते हुए केपी सिंह ने पेड़ की एक भी टहनी काटे बिना खूबसूरत चार मंजिला मकान बनाया और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की। केपी ने बताया कि जब पेड़ पर घर बनाने की उन्‍होंने घोषणा की तो कई लोगों ने उनका मजाक उड़ाया।

पेड़ पर बने घर के अंदर बना किचेन जिसमें टहनियां ही करती हैं सोफे का काम

क्या खास है इस ट्री हाउस में ?

केपी सिंह के इस घर में वो सभी सुविधाएं हैं, जो किसी भी सामान्‍य घर में होती हैं, लेकिन आम के पेड़ पर होने के कारण यहां से गुजरने वालों का ध्यान बरबस ही इस ट्री-हाउस की ओर चला जाता है। इस घर में किचन, बाथरूम, डायनिंग और बेडरूम हैं। ट्री-हाउस में डायनिंग, ड्राइंग रूम में पेड़ की टहनियों को ही सोफे के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। केपी सिंह बताते हैं कि प्रकृति बचाने की प्रेरणा उन्हें विरासत में मिली थी। उन्‍होंने मकान बनाते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा कि प्रकृति और पेड़ को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

ये विशेषताएं घर को बनाती हैं खास

  • 87 साल पुराने इस आम के पेड़ की एक भी टहनी काटे बगैर बनाया गया है यह ट्री-हाउस।
  • इस ट्री हाउस में चढने के बनाई गईं सीढि़यां रिमोट से संचालित होती हैं।
  • इस घर की बालकनी से जो नजारा दिखता है वो बेहद खूबसूरत है।
  • इस मकान की खिड़की से तोड़े जा सकते हैं आम।
  • यह अनूठा ट्री-हाउस जमीन से 9 फीट ऊपर से शुरू होता है।
  • इस चार मंजिला मकान की ऊंचाई करीब 39 फीट है।

घर बनाने में लकड़ी का इस्‍तेमाल नहीं

खास बात यह है कि इतने बड़े मकान को तैयार करने में केपी सिंह ने कहीं भी लकड़ी का इस्तेमान नहीं किया। इस ट्री हाउस में स्ट्रील स्ट्रक्चर, सैल्यूलर शीट, और फाइबर का इस्‍तेमाल किया गया है। इस मकान की डिजाइन इस तरह से तैयार की गई है कि पेड़ की टहनियों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचे। ट्री-हाउस की खिड़कियों से होते हुए जो टहनियां अंदर आती हैं, उन्‍हीं को सोफे के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस पर बैठकर प्रकृति के खूबसूरत नजारों का लुत्फ लिया जा सकता है।

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