संयुक्त राष्ट्र ने कहा – कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन, भारत ने किया खारिज

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  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय सुरक्षाबलों पर उठाए सवाल

नई दिल्‍ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की उस रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए खारिज कर दिया है जिसमें कथित तौर पर कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। इस मुद्दे पर मुख्‍य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी भारत सरकार के रुख का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार (14 जून) को जारी अपनी रिपोर्ट में कश्मीर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और उसकी जांच की बात कही है। हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट का स्वागत किया है।

क्‍या कहा गया है यूएन रिपोर्ट में ?

संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को कहा कि भारत के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है। इसकी अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर जांच कराने की मांग की गई है। संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के उच्चायुक्त ज़ायद बिन राड अल हुसैन ने कहा है कि वो मानवाधिकार काउंसिल से अगले हफ़्ते नए सत्र के लिए कहेंगे, जिसमें एक जांच आयोग गठित करने पर विचार किया जाएगा जो कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की स्वतंत्र रूप से जांच करेगा।

और क्‍या कहा संयुक्‍त राष्‍ट्र ने ?

रॉयटर्स के अनुसार, यूएन की रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर पर ही केंद्रित है। इसमें जुलाई 2016 से अप्रैल 2018 के वाक़यों का ज़िक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अनुमान के अनुसार इस अवधि में कश्मीर में सुरक्षाबलों के हाथों 130  से 145  के बीच नागरिक मारे गए, जबकि इसी दौरान चरमपंथियों के हाथों 20 नागरिक मारे गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2016  में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद सुरक्षाबलों ने ज़्यादा ताक़त का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि भारत में सुरक्षाबलों पर कोई मुकदमा भी नहीं चलता है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में इन्हें 1990 के नियम के तहत ज़्यादा अधिकार मिले हुए हैं।

भारत ने कहा, रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण ?

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट को पूरी तरह से ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह भारत की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है और उसकी क्षेत्रीय अखंडता के ख़िलाफ़ है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूएन की रिपोर्ट अपुष्ट सूचनाओं पर आधारित और पक्षपातपूर्ण है। यह गलत मंशा से जारी की गई है और पूर्वाग्रह से प्रेरित है तथा एक झूठे ब्यौरे के अलावा कुछ नहीं है। भारत ने सवाल किया कि आख़िर इस रिपोर्ट को जारी करने के पीछे मंशा क्या है ? बता दें कि भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान चरमपंथियों को ट्रेनिंग देकर कश्मीर में घुसपैठ कराता है। दूसरी तरफ़ पाकिस्तान भारत के इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है।

कांग्रेस ने भी की रिपोर्ट की निंदा

कांग्रेस ने भी संयुक्‍त राष्‍ट्र रिपोर्ट की कड़ी निंदा की है और कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में बिना किसी जानकारी के यह रिपोर्ट तैयार की गई है। कांग्रेस प्रवक्‍ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘जम्‍मू-कश्‍मीर भारत का अखंड और अभिन्न अंग है। यह रिपोर्ट निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।’  उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की यह रिपोर्ट जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के कृत्‍य को कैसे उचित ठहरा सकती है?’ सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘क्या संयुक्त राष्ट्र को भारतीय सरजमीं पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद पर गौर नहीं करना चाहिए?’

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