भारतीयों को मूर्ख समझते थे मशहूर वैज्ञानिक आइंस्टीन !

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नई दिल्ली। महात्मा गांधी को भला कौन नहीं जानता। और अल्बर्ट आइंस्टीन को भी हर कोई जानता है। खास बात ये कि महात्मा गांधी के बारे में आइंस्टीन ने कहा था कि आने वाली पीढ़ियों को यकीन नहीं होगा कि हड्डी और मांस से बना ये आदमी कभी धरती पर चला भी होगा। महात्मा गांधी के बारे में आइंस्टीन के ये विचार जानकर हमें लग सकता है कि वो भारतीयों को बहुत मानते रहे होंगे, लेकिन आइंस्टीन की एक डायरी बताती है कि आम भारतीयों के बारे में आइंस्टीन का मानना था कि वो मूर्ख होते हैं। आइंस्टीन की भारतीयों के प्रति इस सोच को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आइंस्टीन को नस्ली भेदभाव का विरोधी भी माना जाता था।

नस्ली भेदभाव के विरोध में ये बोले थे आइंस्टीन
1946 में आइंस्टीन ने अमेरिका के एक कॉलेज में पहली बार अश्वेत छात्रों को डिग्री दिए जाने के मौके पर नस्ली भेदभाव के खिलाफ अपने विचार रखे थे। तब उन्होंने कहा था कि नस्ली भेदभाव श्वेत लोगों की एक बीमारी है, जबकि उनकी डायरी में लिखा है कि भारतीय आमतौर पर मूर्ख होते हैं और उन्हें किसी चीज पर कदम उठाना हो, तो 15 मिनट से ज्यादा सोच ही नहीं सकते।

डायरी में भारतीयों के बारे में लिखी टिप्पणी
हाल ही में आइंस्टीन की डायरियां सामने आई थीं। इन्हीं में आइंस्टीन ने भारतीयों के खिलाफ टिप्पणी की थी। आइंस्टीन की इन्ही नस्ली टिप्पणियों को लेकर भारत, श्रीलंका और चीन में लोग नाराजगी जता रहे हैं। आइंस्टीन की डायरियों से खुलासा होता है कि वो उन्हें जैविक तौर पर नीची निगाह से देखते थे। बता दें कि आइंस्टीन ने अक्टूबर 1922 से मार्च 1923 के बीच एशिया के कई इलाकों का दौरा किया था। साथ ही वो फिलिस्तीन और स्पेन भी गए थे। इसके बाद ही उन्होंने डायरी में ये बात लिखी थी।

श्रीलंका आए थे आइंस्टीन
बता दें कि अपनी यात्रा के दौरान आइंस्टीन श्रीलंका भी आए थे। वहां के लोगों के बारे में एटम बम के पितामह कहे जाने वाले आइंस्टीन ने डायरी में टिप्पणी लिखी है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने डायरी में लिखा है कि श्रीलंका के लोग प्रागैतिहासिक युग में जी रहे हैं। साथ ही ये भी लिखा कि श्रीलंका और आसपास के देशों में जो पर्यावरण है, उससे भी यहां के लोगों के सोचने की शक्ति कम होती है। आइंस्टीन ने लिखा है कि इस पर्यावरण में रहने से हम भी भारतीयों जैसे कुंद बुद्धि के हो जाएंगे।

क्या आइंस्टीन मानते थे नस्लीय भेदभाव ?
अब आपको बताते हैं कि आइंस्टीन किस नस्ल के थे। आइंस्टीन यहूदी थे और हिटलर के दौर में जर्मनी छोड़कर चले गए थे। जिस तरह अमेरिकी यूनिवर्सिटी में नस्ली भेदभाव के खिलाफ आइंस्टीन ने अपने विचार रखे थे, उसे देखते हुए अब भारतीयों और एशियाई लोगों के बारे में उनके विचार सामने आने के बाद आइंस्टीन को लेकर सवाल उठने लाजिमी ही हैं।

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