भारत में आज भी इन धर्मस्थलों पर नहीं जा सकतीं महिलाएं

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लखनऊ। आज 21वीं सदी में भी हमारे देश में कई ऐसी जगहें मौजूद हैं जहां महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। भारत में आज भी कई ऐसे धर्मस्‍थल हैं जहां पुरुष तो जा सकते हैं लेकिन महिलाओं के प्रवेश करने पर पाबंदी है। आइए जानते हैं कि ऐसे कौन से धार्मिक स्‍थल हैं जहां महिलाएं नहीं जा सकतीं –

अय्यप्पन मंदिर, केरल

केरल में स्थित सबरीमाला अय्यप्पन मंदिर में महिलाओं के लिए काफी सख्त कानून बने हुए हैं। इस मंदिर में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं। नियम के अनुसार, मंदिर में 6 से लेकर 60 साल तक की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है। बता दें कि इस मंदिर में हर साल करोड़ों की संख्‍या में श्रद्धालु भगवान अय्यप्‍पा के दर्शन करने आते हैं, लेकिन इनमें महिलाएं नहीं होतीं। माना जाता है कि भगवान अय्यप्‍पा ब्रह्मचारी थे, इसलिए यहां महिलाओं के आने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस मंदिर के कपाट साल में सिर्फ दो बार 14 जनवरी और 15 नवंबर को खोले जाते हैं।

केरल का सबरीमाला अय्यप्पन मंदिर जहां महिलाओं के लिए काफी सख्त नियम हैं

केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर

भारत के सबसे रहस्यमयी और सबसे अमीर कहे जाने वाले तिरुअनंतपुरम में स्थित इस मंदिर में आज भी स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है। यह वैष्णव मंदिर भारत के सबसे प्राचीन विष्णु मंदिरों में से एक है।  श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में महिलाएं मंदिर के तहखाने तक नहीं जा सकतीं। कुछ साल पहले आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की एक महिला अधिकारी ने प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने की कोशिश की तो उसे भी रोका गया था। मान्‍यता है कि तहखानों में सदियों पुराना लाखों करोड़ रुपए का खजाना रखा हुआ है।

केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर जो देश का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है

गुना का मुक्तागिरि जैन मंदिर

मध्य प्रदेश के गुना में स्थित इस जैन समाज के मंदिर में किसी भी स्त्री द्वारा पश्चिम सभ्यता के कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध है। इस मंदिर को जैन समाज का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है | मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से में स्थित गुना के जैन मंदिरों में महिलाओं के टॉप्स और जींस जैसे पश्चिमी परिधान पहन कर आने की मनाही है। यदि लड़की या महिला ने ऐसे कपड़े पहने हैं तो वह मंदिर में नहीं जा सकती।

मध्य प्रदेश के गुना में स्थित इस मंदिर को जैन समाज का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है

दिल्ली की जामा मस्जिद

मुस्लिम धर्म की सबसे प्राचीन मस्जिदों में से एक दिल्‍ली की जामा मस्जिद में शाम होने के बाद कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर सकती। यह मस्जिद देश की सबसे प्रभावशाली मस्जिदों में से एक मानी जाती है लेकिन यहाँ पर अब भी इस प्रथा का पालन होता है।

देश की सबसे प्राचीन मस्जिदों में से एक है दिल्ली की जामा मस्जिद

मुंबई की बाबा हाजी अली की दरगाह

मुंबई के वर्ली इलाके में एक छोटे से द्वीप पर स्थित हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह किसी भी एक धर्म के लोगों के लिए नहीं है,  यहां सभी धर्मों के लोग आकर अपनी मन्नत माँगते हैं। वर्ष 2011 से पहले महिलाएं मजार तक जाती थीं, लेकिन 2011 में ट्रस्टियों ने महिलाओं के अंदर जाने पर पाबंदी लगा दी। उसके बाद से ही यहां महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध था। इसके पीछे मान्यता यह है कि इस्लाम के अनुसार स्त्रियाँ कब्र के पास नहीं जा सकतीं। इसका काफी विरोध हुआ और मामला कोर्ट तक पहुंचा। अक्‍टूबर, 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाजी अली ट्रस्‍ट ने अब महिलाओं को हाजी अली की मजार तक जाने की इजाजत दे दी है।

मुंबई की प्रसिद्ध हाजी अली की दरगाह में पिछले साल महिलाओं को मिली है प्रवेश की अनुमति

राजस्थान का कार्तिकेय मंदिर

वैसे तो राजस्थान पुष्कर में स्थित अपने इकलौते भगवान ब्रह्मा के मंदिर के कारण विख्यात है, परन्तु पुष्कर में ही स्थित कार्तिकेय मंदिर भी लोगों की आस्था का विशेष केंद्र है। लेकिन यहां पर भी औरतों के जाने पर प्रतिबंध है।  चूंकि कार्तिकेय जी अविवाहित थे,  इसलिए महिलाओं के जाने पर मनाही है। ऐसी मान्‍यता है कि पुष्कर के कार्तिकेय मंदिर में यदि महिला जाती है तो उसे आशीर्वाद नहीं बल्कि श्राप मिलता है। सदियों पुरानी यह परम्‍परा आज भी कायम है।

दुनिया की इन जगहों पर महिलाओं की एंट्री पर है बैन

पुष्कर में स्थित कार्तिकेय मंदिर आज भी लोगों की आस्था का विशेष केंद्र है

दिल्ली की निजामुद्दीन औलिया की दरगाह

दिल्ली के दक्षिणी छोर पर स्थित हज़रत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह चिश्ती समुदाय के चौथे संत हज़रत निजामुद्दीन औलिया की याद में बनाई गई थी।  हज़रत निजामुद्दीन वैराग्य धर्म का बहुत ही सादगी से पालन करते थे, शायद इसी कारण इस दरगाह में औरतों को प्रवेश नहीं दिया जाता। यहां महिलाओं को कब्र तक जाने की इजाजत नहीं है, उन्हें सिर्फ बाहरी हिस्से में जाने की इजाजत है। दरगाह प्रशासन का कहना है कि भले ही मुंबई की हाजी अली दरगाह में महिलाओं को अंदर तक प्रवेश की इजाजत दे दी गई हो, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। यह नियम सभी महिलाओं पर लागू होता है, फिर चाहे वह कोई भी हो।

दिल्ली की हज़रत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में महिलाओं को कब्र के पास जाने की है मनाही

पतबौसी सत्र मंदिरअसम

असम के पतबौसी सत्र मंदिर में महिलाओं को आज भी प्रवेश की इजाजत नहीं है। इसके पीछे उद्देश्‍य है मंदिर को अपवित्र होने से बचाना। मंदिर को चलाने वाली प्रशासनिक संस्था का कहना है कि मासिक धर्म के दिनों में महिला अपवित्र हो जाती है।  वर्ष 2010 में असम के तत्कालीन राज्यपाल जेबी पटनायक ने कुछ महिलाओं के साथ मंदिर में प्रवेश कर नियम तोड़ा था, लेकिन बाद में यह नियम फिर से लागू कर दिया गया।

असम के पतबौसी सत्र मंदिर में महिलाओं को आज भी प्रवेश की नहीं है इजाजत

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