…तो राहुल गांधी को होगी 2 साल की जेल !

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  • आरएसएस मा‍नहानि मामले में राहुल दोषी साबित हुए तो 6 साल तक नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

लखनऊ। आरएसएस मानहानि प्रकरण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भिवंडी की एक अदालत ने मंगलवार (12 जून) को उनके खिलाफ भादंसं की धारा 499 और 500 के तहत आरोप तय कर दिए हैं। अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर मानहानि का मुकदमा चलेगा और उन्‍हें ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। अगर वे दोषी सिद्ध होते हैं तो उन्‍हें 2 साल तक की सजा हो सकती है।

आरोप तय होने के बाद अब शुरू होगा ट्रायल

राहुल गांधी पर आरोप तय होने के बाद अब उनके खिलाफ ट्रायल शुरू होगा। कोर्ट यह तय करेगी कि इस मामले में मुकदमा समरी ट्रायल के रूप में चलेगा या समन ट्रायल के तौर पर। समरी ट्रायल में मामले से जुड़े सीमित सबूतों को देखा जाता है जबकि समन ट्रायल के दौरान सबूत का दायरा व्यापक हो जाता है। बता दें कि राहुल गांधी के वकील नारायण अय्यर ने कोर्ट से समरी नहीं बल्कि समन ट्रॉयल चलाने की मांग की है।

दोषी सिद्ध हुए तो क्‍या होगा ?

बता दें कि आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत मानहानि के इस मामले में अगर राहुल गांधी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें दो साल की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं। मौजूदा कानून के मुताबिक दो साल या अधिक की सजा होने पर 6 साल तक चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। ऐसे में अगर राहुल गांधी को दो साल की सजा होती है तो वे 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इससे उनका राजनीतिक कॅरियर ही बर्बाद हो सकता है। उन्‍हें पार्टी अध्‍यक्ष पद से भी हटना पड़ सकता है।

क्‍या है मामला ?

भिवंडी में 6 मार्च, 2014 को एक रैली के दौरान राहुल गांधी ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले में आरएसएस के कार्यकर्ता राजेश कुंते ने उनके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। इस मामले में भिवंडी की एक अदालत में पिछले महीने 2 मई को सुनवाई हुई थी, जिसमें अदालत ने राहुल गांधी को 12 जून को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था।

धारा 499  500 पर सुप्रीम कोर्ट में हो चुकी है बहस

बता दें कि आईपीसी की धारा 499 और 500  मानहानि से जुड़ी है। इस धारा को लेकर पिछले कुछ साल में काफी बहस हुई है। यहां तक कि राहुल गांधी के मामले में ही उनके वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में बहस की थी। तब सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसला दिया था कि बोलने की आजादी किसी के लिए भी पूर्ण अधिकार नहीं है। दीपक मिश्रा और प्रफुल्ल सी पंत की बेंच ने कहा था कि ये धाराएं पूरी तरह वैध हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह स्‍पष्‍ट कि इन धाराओं के तहत सजा देने में कुछ गलत नहीं है। अब राहुल गांधी को साबित करना पड़ेगा कि उन्होंने जो कुछ कहा, वो किस संदर्भ में कहा और उसमें कितनी सच्चाई है।

अगर सच बोला तो भी हो सकती है कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि इस धारा के तहत समन जारी करते समय बहुत सावधानी बरती जाए। जो लोग इस धारा को हटाने की मांग करते हैं, उनके अपने तर्क हैं। खासतौर पर यह तर्क कि इस धारा के तहत अगर आप सच भी बोल रहे हैं, तो भी आपके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सच अगर ऐसा है जो सार्वजनिक तौर पर बोला जाना ठीक नहीं है तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। हालांकि इसका फैसला अदालत करेगी कि क्या वो सच जनहित में है या नहीं। कहा भी गया है – ‘सत्‍यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात, न ब्रूयात सत्‍यं अप्रियं ’

कई नेताओं पर दर्ज हुए हैं मानहानि के केस

मानहानि के मामले राहुल गांधी सहित कई नेताओं पर दर्ज हुए हैं। अरविंद केजरीवाल पर भी वित्‍त मंत्री अरुण जेटली और नितिन गडकरी समेत चार लोगों ने इसी धारा के तहत मानहानि का मामला दर्ज कराया था। हालांकि बाद में उन्‍होंने सभी से बारी-बारी से माफी मांग ली थी और उनके खिलाफ सभी मामले वापस ले लिये गए थे। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी पर भी इसी तरह का मामला दर्ज है।

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