वेश्याओं के बच्चों को पिता का नाम देने वाले संत भय्यूजी महाराज ने की खुदकुशी

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इंदौर। मशहूर संत भय्यूजी महाराज ने मंगलवार (12 जून) को इंदौर में सिर में गोली मारकर खुदकुशी कर ली। भय्यूजी महाराज की उम्र 50 साल थी। हाल ही में भय्यूजी महाराज ने दूसरी शादी की थी। पहली शादी से उनकी एक बेटी है। गोली लगने के बाद उन्हें इंदौर के मशहूर बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां भय्यूजी महाराज को मृत घोषित कर दिया गया। माना जा रहा है कि पारिवारिक विवाद की वजह से भय्यूजी ने खुदकुशी की।

पहले थे मॉडल, अन्ना हजारे के हैं करीबी

भय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह शेखावत था। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में लोग उन्हें भय्यूजी महाराज कहते थे। उनके हजारों समर्थक हैं। वो अन्ना हजारे के करीबी माने जाते थे और अन्ना उनके सामाजिक कामों से काफी प्रभावित रहे हैं। भय्यूजी महाराज गृहस्थ जीवन में रहते थे। भय्यूजी अलग किस्म के संत थे। किसान की तरह अपने खेतों में जुताई और बुवाई करते थे। क्रिकेट, घुड़सवारी और तलवारबाजी भी करते थे। इसके अलावा भय्यूजी महाराज को कविताएं लिखने का भी शौक था।

भय्यूजी महाराज ने 2017 में डॉ. आयुषी शर्मा से की थी दूसरी शादी

जवानी में की थी मॉडलिंग

जवानी के दिनों में भय्यूजी महाराज ने सियाराम मिल्स के कपड़ों के लिए मॉडलिंग भी की थी। 29 अप्रैल, 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में भय्यूजी महाराज का जन्म हुआ था। महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा हासिल था। राजनीतिक क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव रहा। उनके ससुर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे। केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख और नितिन गडकरी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उनके भक्तों की सूची में थे।

देश को मठ मानते थे भय्यूजी

भय्यूजी महाराज ने हमेशा पद, पुरस्कार, शिष्य और मठ का विरोध किया। उनके अनुसार देश से बड़ा कोई मठ नहीं होता। व्यक्तिपूजा को वह अपराध मानते थे। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंडारपुर में रहने वाली वेश्याओं के 51 बच्चों को उन्होंने पिता के तौर पर अपना नाम दिया। बुलडाना जिले के खामगांव में उन्होंने आदिवासियों के बीच 700 बच्चों का आवासीय स्कूल बनवाया था। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में उनके कई आश्रम हैं।

नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने सद्भावना उपवास किया था, तब भय्यूजी ने ही जूस पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया था

गुरु दक्षिणा में लगवाते थे पौधा

भय्यूजी महाराज ग्लोबल वॉर्मिंग से भी चिंतित थे। वो गुरु दक्षिणा में एक पौधा लगवाते थे। लाखों पौधे उन्होंने लगवाए। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल देवास और धार जिलों में उन्होंने करीब एक हजार तालाब खुदवाए। भय्यूजी कभी भी अपने भक्तों से नारियल, शॉल, फूल-माला भी नहीं स्वीकारते थे। वो अपने शिष्यों से कहते थे कि फूल-माला और नारियल में पैसा बर्बाद करने से बेहतर है कि धन को शिक्षा में लगाया जाए। ऐसे ही पैसे से उनका ट्रस्ट करीब 10 हजार बच्चों को स्कॉलरशिप देता है।

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