अब मौसम विभाग पहले ही बता देगा कहां आएगी कितनी बाढ़

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  • देश में पहली बार बाढ़ का पूर्वानुमान जारी कर सकेगा मौसम विभाग, नई तकनीक का परीक्षण जारी
  • विभाग के डायरेक्टर ने कहा, विभिन्न क्षेत्रों की मिट्टी का अध्ययन कर लगाया जा सकेगा बाढ़ का पूर्वानुमान

नई दिल्ली। अभी भारतीय मौसम विभाग (IMD) देश में केवल भारी बारिश की चेतावनी जारी करता है, लेकिन अब नई तकनीक के जरिये विभाग यह बता सकेगा कि कहां कितनी बाढ़ आने का खतरा है। इस पूर्वानुमान के आधार पर बाढ़ की चेतावनी और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को इससे बचने के बारे में दिशानिर्देश भी दिए जा सकेंगे। आईएमडी के महानिदेशक केजे रमेश ने बताया कि विभाग फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम (FFGS) की मदद से इस सर्विस को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि ये सिस्‍टम अगले महीने से काम करना शुरू कर देगा। बता दें कि अभी केंद्रीय जल आयोग (CWC) बाढ़ की चेतावनी जारी करता है।

देश में पहली बार शुरू होगी ये सुविधा

मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने बताया कि देश में पहली बार ‘फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम’ की मदद से यह सुविधा अगले महीने शुरू करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘पहली बार इस तकनीक की मदद से इस सेवा को शुरू किया जायेगा। फिलहाल यह परीक्षण के दौर में है। उम्मीद है अगले महीने इसे शुरू कर दिया जाएगा।

मिट्टी का अध्ययन होगा अहम

केजे रमेश ने बताया कि इस तकनीक के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में पाई जाने वाली मिट्टी का अध्ययन किया जाएगा और ये पता लगाया जाएगा कि वे कितना पानी सोखती हैं। इससे उस क्षेत्र में बारिश के पूर्वानुमान के आधार पर पहले ही यह तय किया जा सकेगा कि कितना पानी जमीन में समाहित होगा और कितना पानी नदी, नालों सहित अन्य जलाशयों में जाने के बाद शेष बचेगा जो बाढ़ का रूप लेगा। उन्होंने बताया देश के हर हिस्से में मिट्टी के अध्ययन के आंकड़े हमारे पास पहले से ही मौजूद हैं। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तापमान और वर्षानुमानों का आधार भी एफएफजीएस में होगा।

दी जा सकेगी बाढ़ की सटीक जानकारी 

केजी सुरेश ने बताया कि फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम से क्षेत्र विशेष की भौगोलिक परिस्थितियों के आकलन और वर्षा जल की अधिक मात्रा के आधार पर बाढ़ की सटीक जानकारी दी जा सकेगी। इसके साथ ही राज्य एवं जिला स्तर पर कृषि एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समुचित परामर्श भी दिया जा सकेगा।

हर क्षेत्र के लिए अलग पूर्वानुमान

आईएमडी के महानिदेशक ने कहा, ‘नए सिस्टम के जरिए हम अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग बाढ़ का पूर्वानुमान जारी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान और मध्य प्रदेश की मिट्टी में पानी सोखने की क्षमता ज्यादा है, इसलिए यहां 10-20 सेंटीमीटर बारिश की वजह से बाढ़ आना मुश्किल है। वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड जैसे राज्यों में जहां की मिट्टी कम पानी सोखती है, वहां अगर इतनी ही बारिश होती है तो इसकी वजह से बाढ़ आ सकती है।’

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