जानिए, सोशल मीडिया की लगाम कसने का क्यों आ गया है वक्त

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया के फायदे तो हैं, लेकिन ये नुकसान ज्यादा कर रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए समाज को बांटने वाली विचारधारा तो फैलाई ही जा रही है। साथ ही हिंसा की घटनाओं में सोशल मीडिया की भूमिका कितनी हो गई है, ये सामने आ रहा है। 2013 में यूपी के मुजफ्फरनगर में हुए दंगों से लेकर अभी मेघालय की राजधानी शिलांग में हो रही हिंसा में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका सामने आ रही है।

शिलांग में क्या हुआ है ?
मेघालय की राजधानी शिलांग में 31 मई, 2018 को खासी समुदाय का खलासी अपनी बस पार्क कर रहा था। तभी पंजाबी बस्ती की एक महिला ने आपत्ति जताई। दोनों पक्षों के बीच तू-तू, मैं-मैं हुई। पुलिस ने जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचकर मामले को शांत करा दिया था, लेकिन कुछ देर बाद ही सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल हुआ कि पंजाबी बस्ती के लोगों ने खासी समुदाय के शख्स की हत्या कर दी है। वहीं, पंजाबी बस्ती के लोगों को मैसेज मिला कि खासी समुदाय के युवक ने एक पंजाबी लड़की से छेड़छाड़ की है। इसके बाद ही लोग सड़क पर उतर आए और हिंसा और आगजनी होने लगी। हिंसा बंद कराने के लिए सेना भी बुलाई गई, लेकिन अब तक इसे रोका नहीं जा सका है।

मुजफ्फरनगर में क्या हुआ था ?
मुजफ्फरनगर के कवाल में दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या के बाद हिंसा भड़की थी। हिंसा से पहले 15 अगस्त, 2010 का पाकिस्तान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सियालकोट का था, लेकिन मुजफ्फरनगर में इसे ये कहकर प्रसारित किया गया कि ये कवाल में दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का वीडियो है। इसके बाद ही वहां दंगे हुए और दर्जनों लोगों की जान गई।

चीन में नहीं चलता फेसबुक-ट्विटर, युगांडा ने लगाया है टैक्स
हिंसा की घटनाओं में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सवाल ये उठता है कि क्या इस पर रोक लगा दी जाए या इस पर चलने वाले कंटेंट पर किसी तरह की निगरानी हो ? मसलन, चीन में फेसबुक नहीं चलता। ट्विटर की जगह चीन की सरकार ने ‘वेइबो’ नाम का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चला रखा है। उसमें आने-जाने वाले हर मैसेज पर सरकारी तंत्र नजर रखता है। वहीं, हाल ही में युगांडा ने सोशल मीडिया पर टैक्स लगा दिया है। वहां, अब सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को भारतीय मुद्रा के 3 रुपए 36 पैसे के बराबर टैक्स सरकार को देना होगा।

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