रिसर्च : प्रदूषण कम हो तो बढ़ जाती है 15 फीसदी उम्र

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  • शोध में आया सामने – जहरीली हवा से पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी हो रही है प्रभावित

लखनऊ। एक रिसर्च के मुताबिक, अगर हवा में मौजूद धूल कणों में 10 माइक्रोग्राम की कमी आती है तो व्यक्ति का जीवन काल 0.77 प्रतिशत प्रतिवर्ष बढ़ता है, जबकि कुल उम्र करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। पीएम 2.5 की मात्रा अत्यधिक प्रदूषण का संकेत मानी जाती है, जिससे विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

दिमाग पर किए गए परीक्षण

कुछ लोगों के दिमाग पर किए गए परीक्षण में 10 लाख मस्तिष्क टिश्यू में लाखों चुंबकीय पल्प कण पाए गए हैं। यह कण हमारे मस्तिष्क को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। मानव मस्तिष्क में पाए जाने वाले अधिकांश मैग्नेटाइट, चुंबकीय लोहे के ऑक्साइड के यौगिक का मुख्य रूप, उच्च मात्रा में उद्योगों से निकलने वाली प्रदूषित वायु की वजह से बनते हैं। जब अल्जाइमर रोग से पीड़ित रोगियों की जांच की गई तो डॉक्टरों ने पाया कि उन रोगियों में उनके दिमाग में मैग्नेटाइट के मौजूद होने की मात्रा उच्च है। चुंबकीय प्रदूषक कण मस्तिष्क तक पहुंचने वाले ध्वनियों और संकेतों को रोक देते हैं, जिससे अल्जाइमर रोग भी हो सकता है।

डीजल के धुएं से नपुंसकता का ख़तरा

जहरीली हवा से पुरुषों में प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है और शोध बताते हैं कि ज्यादा वायु प्रदूषण वाले इलाकों में रहने वाले पुरुषों के स्पर्म खराब हो जाते हैंI। शोध के अनुसार, जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, यह समस्या भी उसी रफ़्तार से बढ़ रही है।I अनुमान है कि वर्ष 2010 में दुनिया भर में करीब 5 करोड़ दम्पति बाँझ या संतान पैदा करने के अनुपयुक्त थेI।

फल और सब्जियां तक बन रहीं जहरीली

अगर आपका सोचना है कि वायु-प्रदूषण से सिर्फ जीव-जन्तु ही प्रभावित होते हैं, वनस्पतियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता, तो आप गलत हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि पेड़-पौधे भी वायु प्रदूषण से काफी प्रभावित होते हैं। इससे पेड़ों की आयु कम हो रही है। प्रदूषण के असर से सब्जियां और फल विषैले हो रहे हैं।

देहरादून स्थित भारतीय वानिकी संस्थान (FRI) के वैज्ञानिकों ने प्रदूषण के कारण पेड़-पौधों पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्यापक शोध किया है। शोध में सामने आया कि बढ़ते प्रदूषण के कारण पेड़ों में कार्बन सोखने की क्षमता पिछले कई सालों से घट रही है। यह पेड़ों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे पर्यावरण के लिए खतरनाक है। इस पर अभी ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में इसके बहुत घातक परिणाम हो सकते हैं।

बदल रहा है पत्तों का आकार

प्रदूषण के कारण पेड़ों के पत्तों का आकार भी तेज़ी से बदल रहा है। पत्तों का आकार पहले से बड़ा और मोटा हो गया है, जिससे उनमें ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई है। इसके साथ ही ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में पत्तों में कार्बन सोखने की क्षमता 36.75 फीसदी कम हो गई है। वैज्ञानिक कहते हैं कि पेड़ों के पत्तों में जो सूक्ष्म छेद कार्बनडाई ऑक्साइड खींचते हैं, वो प्रदूषण के कारण बंद हो जा रहे हैं।

वैसे प्रदूषण का असर सिर्फ पत्ते-पत्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर फल और सब्जियों पर भी हो रहा है। प्रदूषण के असर से सब्जियां और फल के भीतर तक रसायनों का असर पहुँच जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मैदानी इलाके के साथ-साथ हिमालय क्षेत्र में भी बढ़ते प्रदूषण का असर देखने को मिल रहा है। पहाड़ी इलाकों के पेड़ों में बदलाव पाया गया है।

कनाडा में फसलों पर शोध

एक शोध कनाडा के ओंटारियो क्षेत्र में फसलों पर किया गयाI। अध्ययन से पता चला कि वायु प्रदूषण के लिए जिम्‍मेदार वायु में मौजूद पीएम-2 के सम्पर्क में रहने पर फसलों को कई प्रकार का नुकसान हो सकता है। इससे पत्तों पर धब्बे पड़ जाते हैं और वे जल्द पीले होने लगते हैं। पौधों का विकास भी रुक जाता है और वो समय से पहले सूख जाते हैं। पौधों को अमूमन सल्फर डाईऑक्साइड, फ्लोराइइ्स, अमोनिया तथा विभिन्न प्रकार के धूल कण प्रदूषित करते हैं।

पौधों का हो रहा अनियमित विकास

कुछ वैज्ञानिकों के अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि सल्फर डाईऑक्साइड तथा ओजोन से पौधों के जमीन के नीचे वाले भाग (जड़ इत्यादि) में विकास रुक जाता है। इसके विपरीत पौधे के जमीन के ऊपर स्थित भाग (तना, पत्ता, फूल, फल इत्यादि) में विकास की गति तेज हो जाती है। जड़ का विकास बंद हो जाने के कारण पौधों को जमीन से आवश्यक मात्रा में पोषक पदार्थ उपलब्ध नहीं हो पाते। इसी वजह से पौधे धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं, और अन्त में बहुत कम आयु में ही वे पूरी तरह सूख जाते हैं।

हालांकि न्यूयॉर्क में प्रदूषण का पेड़ों पर आश्चर्यजनक असर देखने को मिला है। वहां प्रदूषण के कारण हवा में कुछ ऐसे रसायनों मेल हो गया है कि एक ही प्रजाति के पेड़ों की तुलना करें तो शहर के पेड़ बाहर के पेड़ों के मुक़ाबले लंबे हो रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि हवा में कुछ ऐसे रसायन बन रहे हैं जो शहरों में पेड़ों को लंबा होने में मदद दे रहे हैं।

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