आपकी नींद का देश के आर्थिक नुकसान से है सीधा रिश्ता ! जानिए कैसे

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विक्टोरिया। तमाम लोग नींद न आने यानी स्लीप एप्निया के शिकार होते हैं। रात-रात भर जागते हैं। इलाज कराते-कराते परेशान हो जाते हैं, लेकिन ऐसे लोगों को नींद नहीं आती। नींद न आने के शिकार लोगों की भारत में भी अच्छी-खासी तादाद है। भारत में करीब 93 फीसदी लोग इसके शिकार होते हैं।

नींद न आने का देश को नुकसान से है रिश्ता
लोगों को नींद न आने का देश को अरबों के नुकसान से सीधा संबंध एक शोध में सामने आया है। ये शोध ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया ने किया है। इसमें लोगों में नींद की कमी को आर्थिक परिणामों से जोड़कर देखा गया है। शोध में नींद कम होने का स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च, कार्यक्षमता पर असर और इससे होने वाले नुकसान के अलावा एक्सीडेंट्स से भी नाता जोड़ा गया है।

ऑस्ट्रेलिया को कितना होता है नुकसान ?
शोध के मुताबिक, लोगों में नींद की कमी से ऑस्ट्रेलिया को 17.88 अरब डॉलर का नुकसान होता है। ये ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी का करीब डेढ़ फीसदी है। यानी लोगों को नींद न आने से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगता है। स्लीप सर्वे बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में 33 से 45 फीसदी लोग ठीक से सो नहीं पाते। अमेरिका में ये दर 30 फीसदी और ब्रिटेन में 37 फीसदी है।

भारत में कितने लोग नींद न आने से पीड़ित ?
एक अन्य शोध के मुताबिक, भारत में करीब 93 फीसदी लोगों को ठीक से नींद नहीं आती। शोध के मुताबिक, 72 फीसदी भारतीय रात में एक से तीन बार जाग जाते हैं। नींद न आने से 87 फीसदी भारतीयों की तबीयत खराब होती है। 58 फीसदी भारतीयों को नींद न आने से उनका काम प्रभावित होता है, जबकि 38 फीसदी लोगों ने देखा कि दफ्तर में उनका कोई साथी सो रहा है। भारत में स्लीप एप्निया को ठीक करने यानी लोगों को भरपूर नींद दिलाने के लिए भी कारोबार शुरू हो गया है। एक सर्वे के मुताबिक, स्लीप थेरेपी मार्केट हर साल 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और ये कारोबार फिलहाल 80 करोड़ रुपए से ज्यादा का है।

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