कटक के चाय वाले ने 75 से अधिक बच्चों के जीवन में भरा शिक्षा का उजियारा

150 0
  • 18 साल से स्‍लम के 75 गरीब बच्‍चों को चाय बेचकर पढ़ा रहे हैं प्रकाश राव
  • गरीब बच्‍चों पर खर्च करते हैं आधी आमदनी, खुद छोड़ दी थी अपनी पढ़ाई

लखनऊ। इंसान के अंदर अगर लगन और हौसला हो तो वह कुछ भी कर सकता है। वह समाज में बड़े बदलाव ला सकता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं उड़ीसा के कटक में रहने वाले डी. प्रकाश राव। राव पिछले पांच दशकों से शहर में चाय बेच रहे हैं। उन्होंने झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए ‘आशा-आश्वासन’ नाम का एक स्कूल खोला है, जिसके जरिए उन्होंने 75 से अधिक बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा भरा है।

बीच में ही छोड़ दी थी अपनी पढ़ाई

डी. प्रकाश राव कटक के बख्शीबाजार में एक झुग्‍गी बस्‍ती में रहते हैं। यहीं उनकी चाय की दुकान भी है, जिसकी शुरुआत 1976 में हुई। पहले उनके पिताजी इस चाय की दुकान को चलाते थे। प्रकाश बताते हैं कि उनके पिता ने दूसरे विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया था, बाद में ये दुकान खोल ली। प्रकाश बचपन में पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वे उनके काम में मदद करें। जब प्रकाश 11वीं क्लास में थे तो उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़े। इसके कारण प्रकाश पढ़ाई छोड़कर चाय की दुकान चलाने लगे।

प्रकाश राव स्कूल में खुद भी पढ़ाते हैं और टीचर भी रखा है

झुग्‍गी के बच्‍चों के लिए खोला स्‍कूल

प्रकाश ने देखा कि उनकी झुग्गी में रहने वाले लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। वे बच्चों से काम करवाकर पैसा कमाना चाहते हैं। वहां आसपास कोई स्कूल था भी नहीं। ऐसे में उन्‍होंने इन बच्‍चों को पढ़ाने का बीड़ा उठाया। प्रकाश ने अपने पैसे से वहां सन 2000 में एक स्कूल खोला। शुरू-शुरू में स्‍कूल में बच्‍चे आते ही नहीं थे, तब उन्‍होंने आसपास रहने वाले लोगों को समझा-बुझाकर उनके बच्चों को वहां पढ़ाने के लिए राजी किया।

बच्‍चों को मिलता है दूध और बिस्किट

स्‍कूल आने वाले बच्चे चूंकि गरीब परिवारों से हैं, इसलिए प्रकाश इन बच्चों को रोज एक गिलास दूध और बिस्किट देते हैं। इससे बच्‍चों को पोषण मिलता है और वे रोजाना स्कूल भी आते हैं। हालांकि यह स्कूल सिर्फ तीसरी कक्षा तक है। तीसरी पास करने वाले बच्चों को प्रकाश सरकारी स्कूल में दाखिल दिला देते हैं। वे स्‍कूल में खुद भी पढ़ाते हैं और उन्होंने कुछ शिक्षक भी रखे हैं। प्रकाश राव की जितनी भी कमाई होती है, उसका 50 फीसदी वे इस स्‍कूल पर खर्च कर देते हैं।

मदद के लिए आगे आए लोग

शुरुआत में प्रकाश राव स्कूल चलाने का पूरा खर्चा खुद उठाते थे, लेकिन अब कुछ अन्य लोग भी इस काम में उनकी मदद के लिए आगे आए हैं। अभी उनके स्कूल में करीब 80 बच्चे पढ़ रहे हैं। प्रकाश स्‍कूल के अलावा पास के एससीबी अस्पताल में सरकार की मदद से एक सहायता केंद्र भी चलाते हैं, जिसके जरिए वे मरीजों को दूध, गर्म पानी,  आइस क्यूब और जरूरत की अन्य चीजें उपलब्ध करवाते हैं। दिसम्बर 2015 में मानवाधिकार दिवस पर ओडिशा ह्यूमन राइट कमीशन ने प्रकाश को सम्मानित भी किया था। उनके इस स्कूल पर डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी हैं।

पीएम मोदी ने भी की राव की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने 27 मई को रेडियो पर अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में डी. प्रकाश राव की खूब तारीफ की। पीएम ने कहा कि कुछ लोग अपने कार्यों, अपनी मेहनत से बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ते है। उसे हकीकत का रूप देते हैं। ऐसी ही कहानी है कटक में रहने वाले प्रकाश राव की। मोदी ने कहा, ‘पिछले 50 साल से चाय बेचने वाले प्रकाश राव अपनी आधी आमदनी गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं। वो हम सब के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं।’ पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात भी की थी।

Related Post

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *