मोदी के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में अड़ंगा, आदिवासियों ने जमीन देने से किया इनकार

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मुंबई। पीएम मोदी के बुलेट ट्रेन के ड्रीम प्रोजेक्‍ट को झटका लग सकता है। केन्द्र की मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट के बारे में कहा जा रहा था कि यह 2022 तक पूरा हो जाएगा, लेकिन अब महाराष्ट्र के पालघर जिले में इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन मिलने में मुश्किलें आ रही हैं। स्थानीय समुदाय और जनजातीय लोग इसके विरोध में आगे आ गए हैं। बता दें कि इस प्रोजेक्‍ट पर 1,08,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसका 81 फीसदी हिस्सा जापान लोन के रूप में देगा।

कौन कर रहा है विरोध ? 

एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार, पालघर जिले के 70 से ज्यादा आदिवासी गांवों में लोगों ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्‍ट के लिए अपनी जमीन देने से मना कर दिया है। यही नहीं, इस इलाके से गुजरने वाली महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन की भी तैयारी की जा रही है। बता दें कि सरकार ने 508 किमी लंबे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए 2018 के अंत तक जमीन अधिग्रहण का लक्ष्य रखा है। इस पर जनवरी 2019 से काम शुरू होना है। इस कॉरिडोर का करीब 110 किमी हिस्सा पालघर जिले से होकर गुजरता है जहां आदिवासी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।

अफसरों को समय से काम शुरू होने की उम्‍मीद

अधिकारी ने कहा कि महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हमें विरोध झेलना पड़ रहा है, लेकिन हमें उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट पर काम निर्धारित समय पर शुरू हो जाएगा। अधिकारी ने बताया कि हम जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को सर्किल रेट से 5 गुना अधिक दाम ऑफर कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि इन 73 गांवों में से 50 गांव जल्दी ही राजी हो सकते हैं। इनसे बातचीत जारी है। मुख्य समस्या 23 गांवों को लेकर है, जो रेलवे के साथ किसी भी तरह की वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं। हाल में ही महाराष्‍ट्र के ठाणे जिले के किसानों ने बुलेट ट्रेन परियोजना के खिलाफ कलेक्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था। यहां के किसान जमीन अधिग्रहण के तरीके और मुआवजे से खुश नहीं हैं।

राजनीति भी हो रही प्रोजेक्‍ट को लेकर

उधर, इस प्रोजेक्ट को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। शिवसेना भी इस प्रोजेक्ट के विरोध को हवा देने की कोशिश कर रही है। वहीं महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने बीते दिनों पालघर में महाराष्ट्र के किसानों से अपील की थी कि वे बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अपनी जमीन सरकार को न दें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जमीन खरीदने के बहाने लोगों को उनकी जगह से हटाना चाहती है।

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