शोध : वीडियो गेमिंग से युवा बन रहे स्ट्रैटेजिक थिंकर, बढ़ती है रिएक्शन क्षमता

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नई दिल्ली। टेक्नो कंपनी डेल की ओर से कराए गए एक सर्वे के मुताबिक 50 फीसदी युवाओं का मानना है कि वीडियो गेमिंग से उन्हें स्ट्रैटेजिक थिंकर बनने में मदद मिली। इससे चीजों को समझने और पहचान कर रिएक्ट करने की क्षमता बढ़ने की बात युवा कह रहे हैं।

कितने युवाओं पर हुआ शोध ?
डेल ने भारत समेत 11 देशों के 5 हजार 763 गेमिंग करने वालों पर ये शोध किया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 46 फीसदी को लगता है कि गेमिंग ने उन्हें हर परिस्थिति से निपटने लायक बनाया। 37 फीसदी का कहना था कि गेमर कहलाना उन्हें बुरा नहीं लगता, बल्कि इससे वे कॉम्पिटिटिव एटमॉस्फियर महसूस करते हैं। रिपोर्ट से साफ है कि गेमिंग इन्हें जिंदगी के अन्य पहलुओं से अलग नहीं कर रही।

गेमिंग करने वालों की जानकारी देने वाला रिसर्च
शोध से पता चला कि करीब 68 फीसदी गेमर म्यूजिक के शौकीन हैं। वहीं,  57 फीसदी को परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। 56 फीसदी ने ट्रैवेलिंग को हॉबी बताया तो 40 फीसदी गेमिंग करने वालों ने पढ़ने और लिखने को पसंदीदा बताया।

कपल्स को भी करीब लाती है गेमिंग
खास बात ये भी है कि गेमिंग कपल्स को करीब लाने में भी अच्छी भूमिका निभा रही है। भारत के 25 फीसदी गेमिंग करने वालों की पत्नी भी गेमिंग करती हैं। 30  फीसदी युवाओं के मुताबिक, गेमिंग के शौक ने लोगों के साथ रिश्ता मजबूत करने में मदद की।

2000 करोड़ का है कारोबार
पहले कहा जाता था कि ‘खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब, पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब’, लेकिन गेम्स का अगर नकारात्मक असर होता तो लोग इससे नहीं जुड़ते। हालांकि, सेक्स, हिंसा और नस्लवादी भावनाएं बढ़ाने वाले गेम्स की वकालत नहीं की जा सकती, लेकिन गेमिंग की दुनिया यहीं तक नहीं है। हालत अभी की ये है भारत में गेमिंग का कारोबार करीब 2000 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा है।

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