ब्रिटेन में दांत की बीमारियां बनीं देशव्यापी संकट, बीडीए ने जताई चिंता

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लंदन। ब्रिटेन के नागरिकों में दांतों की समस्‍या बड़े पैमाने पर सामने आ रही है। यहां के बाशिंदों के दांतों का क्या हाल है, यह इसी से पता चलता है कि 2017 में देश भर के अस्पतालों में रोजाना औसतन 170 युवाओं ने अपने दांत उखड़वाए। देश की ‘ओरल हेल्थ क्राइसिस’ के लिए शक्कर को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

एक साल में हुए 42,911 युवाओं के ऑपरेशन

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विसेज (NHS) द्वारा खर्च की गई रकम के आंकड़े बताते हैं कि 2016-17 में 18 साल से कम उम्र के युवाओं के दांत उखाड़ने के लिए 42,911 ऑपरेशन किए गए जिस पर 36 मिलियन पौंड से ज्यादा लागत आई। वर्ष 2012-13 के मुकाबले यह 17 फीसदी की वृद्धि है, जब 36833 ऑपरेशन किए गए थे। अस्पताल में दांत के ऑपरेशन से मतलब है कि जब मरीज को जनरल एनेस्थेसिया देने की जरूरत पड़ी हो, जो किसी डेंटिस्ट द्वारा नहीं दिया जा सकता। आंकड़े के अनुसार, 2012 से एनएचएस ऐसे इलाजों पर 165 मिलियन पौंड खर्च कर चुका है।

सॉफ्ट ड्रिंक्स पर बैन लगाने की मांग

ब्रिटिश डेंटल एसोसिएशन (BDA) ने इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए कहा है कि सरकार दांत संबंधी समस्या के प्रति उदासीन रवैया अपनाए हुए है। ब्रिटेन की लोकल गवर्नमेंट एसोसिएशन ने सेहत के लिए ख़राब चीज़ों और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर बैन लगाने की मांग की है। यह भी मांग की जा रही है कि सॉफ्ट ड्रिंक्स में शक्कर की मात्रा सीमित की जाए और लेबल में यह लिखा जाए कि इसमें कितने चम्मच शक्कर है।

5 वर्ष से छोटे बच्चों के डेंटल चेकअप का अभियान

बहरहाल, ये तो तय है कि ब्रिटेन में शक्कर युक्त खाने-पीने की चीजों के प्रति किशोरों और बच्चों में एडिक्शन जैसा है। बाजार में तरह-तरह के पेय पदार्थ उपलब्ध हैं, जिनमें भारी मात्रा में शक्कर घुली होती हैI वैसे, एनएचएस का कहना है कि दांत उखड़वाने की मौजूदा स्थिति ‘महामारी’ के सामान है जिसे टाला जा सकता है। इस दिशा में दांत के डाक्टरों, स्थानीय प्रशासन, अस्पताल के साथ मिल कर यह अभियान चलाया जा रहा है कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेंटल चेकअप समय रहते हो जाया करे।

भारतीय भी दांत की समस्‍याओं के प्रति गंभीर नहीं

भारत में भी दांतों की समस्याओं को लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं। हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि लगभग 95 प्रतिशत भारतीयों में मसूड़ों की बीमारी है, 50 प्रतिशत लोग टूथब्रश का उपयोग नहीं करते और 15  वर्ष से कम उम्र के 70 प्रतिशत बच्चों के दांत खराब हो चुके हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अनुसार, भारतीय लोग नियमित रूप से दंत चिकित्सक के पास जाने की बजाय, कुछ खाद्य और पेय पदार्थों का परहेज कर स्वयं-उपचार को प्राथमिकता देते हैं। दांतों की सेंस्टिविटी एक और बड़ी समस्या है, क्योंकि इस समस्या वाले मुश्किल से 4 प्रतिशत लोग ही दंत चिकित्सक के पास परामर्श के लिए जाते हैं।

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