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प्लास्टिक के दाने समंदर को कर रहे तबाह

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  • अमेरिका-आयरलैंड के बाद यूके व कनाडा ने भी लगाया कॉस्‍मेटिक्‍स में प्‍लास्टिक के दानों पर प्रतिबंध

नई दिल्‍ली। अमेरिका और आयरलैंड के बाद यूके और कनाडा ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में प्लास्टिक के दानों या मनकों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। फिलहाल ये बैन ऐसे प्रोडक्ट्स के निर्माण पर है और जुलाई से इनकी बिक्री पर बैन प्रभावी हो जाएगा।

क्‍यों लगाया गया प्रतिबंध ?

सवाल उठता है कि इन देशों ने प्लास्टिक के दानों या मनकों के इस्तेमाल पर बैन क्‍यों लगाया ? क्या ये महज प्लास्टिक पर रोक है ? ऐसा नहीं है, ऐसा हमारे समन्दरों के जीवों की रक्षा करने के लिए किया गया है क्योंकि फेस स्क्रब और टूथपेस्ट में जो प्लास्टिक के माइक्रोबीड्स मिलाए जाते हैं वो घूम-फिरकर समुद्र में पहुँच जाते हैं। वहां ये समुद्री जीवों और अन्य वन्य जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। जब इंसान इन जीवों को खाते हैं तो उनके शरीर में ये प्लास्टिक पहुँच जाता है। कास्मेटिक के अलावा प्लास्टिक के दानों का इस्तेमाल कई अन्य उद्योगों में भी किया जाता है। माइक्रो बीड्स इतने छोटे होते हैं कि ये फ़िल्टर से भी पार हो जाते हैं। एक अनुमान है कि समुद्रों में प्लास्टिक के 5 ट्रिलियन टुकड़े तैर रहे हैं और ये सुदूरतम हिस्सों तक पहुँच चुके हैं।

समुद्री कचरे का एक तिहाई हैं प्‍लास्टिक की बोतलें

‘गार्जियन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब प्लास्टिक की बोतलों के खिलाफ भी दुनियाभर में दबाव बढ़ने लगा है। बता दें कि विश्व में प्रति मिनट प्लास्टिक की 10 लाख बोतलें खरीदी जाती हैं और ये बोतलें समुद्री प्लास्टिक कचरे का एक तिहाई हिस्सा बन चुकी हैं। अब यूके में प्लास्टिक माइक्रो बीड्स पर प्रतिबन्ध के बाद प्लास्टिक रिटर्न स्कीम, प्लास्टिक के कॉफी कप्स पर शुल्क और प्लास्टिक पैकजिंग पर सख्ती जैसे कदम उठाने पर विचार चल रहा है।

यूके ने उठाए सख्‍त कदम

यूके की थेरेसा में सरकार ने पर्यावरण संबंधी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिनमें हाथीदांत की बिक्री पर प्रतिबन्ध, सर्कस में जंगली पशुओं पर प्रतिबन्ध, पशुओं पर अत्याचार करने पर ज्यादा कठोर दंड शामिल है। प्रधानमंत्री थेरेसा ने पिछले दिनों एक ट्वीट में कहा था कि 2015 में हमने प्लास्टिक बैग्स पर 5 पेंस का चार्ज लगाया था और आज बैग्स के इस्तेमाल में 9 बिलियन की कमी आ चुकी है। बता दें कि प्लास्टिक माइक्रो बीड्स पर अमेरिका 2015 में ही प्रतिबन्ध लगा चुका है। उधर, फ़िनलैंड, फ्रांस, आइसलैंड, लक्जमबर्ग और नॉर्वे भी ऐसा ही बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं।

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