ये हैं 10 सबसे खतरनाक वायरस, ले चुके हैं हजारों लोगों की जान

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नई दिल्ली। केरल में नीपा वायरस से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। नीपा के डर से केरल समेत कई राज्यों में लोग कांप रहे हैं। वजह ये है कि इस वायरस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन नीपा सबसे खतरनाक वायरस नहीं है। 10 और वायरस हैं, जो दुनियाभर में हजारों लोगों की जान ले चुके हैं।

मारबुर्ग वायरस
सबसे खतरनाक वायरस मारबुर्ग है। इस वायरस का नाम लान नदी पर बसे छोटे और शांत शहर पर है, लेकिन इसका बीमारी से कुछ लेना-देना नहीं है। मारबुर्ग रक्तस्रावी बुखार का वायरस है। इबोला की तरह इससे मांसपेशियों के दर्द की शिकायत होती है। श्लेष्मा झिल्ली, त्वचा और अंगों से रक्तस्राव होने लगता है। 90 फीसदी मामलों में मारबुर्ग के शिकार मरीजों की मौत हो जाती है।

इबोला वायरस
इबोला वायरस की पांच किस्म हैं। हर एक का नाम अफ्रीका के देशों और क्षेत्रों पर रखा गया है। जायरे, सूडान, ताई जंगल, बुंदीबुग्यो और रेस्तोन। जायरे इबोला वायरस जानलेवा है। इसके शिकार 90 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है। ये वायरस गिनी, सियरा लियोन और लाइबेरिया में फैल चुका है।

हंटा वायरस
तीसरे नंबर का खतरनाक वायरस हंटा है। हंटा वायरस के कई प्रकार हैं। इस वायरस का नाम उस नदी पर रखा गया है, जहां माना जाता है कि सबसे पहले अमेरिकी सैनिक 1950 के कोरियाई युद्ध के दौरान इसकी चपेट में आए थे। इस वायरस के लक्षणों में फेफड़ों के रोग, बुखार और गुर्दा खराब होना शामिल है।

बर्ड फ्लू वायरस
बर्ड फ्लू वायरस के अलग-अलग प्रकार आतंक का कारण होती हैं। इस वायरस से मौत की दर 70 फीसदी है। हालांकि, हकीकत में H5N1 वायरस की चपेट में आने का जोखिम बेहद कम होता है। तभी इस वायरस के चपेट में आते हैं, जब आपका संपर्क सीधे पोल्ट्री से होता है। यही वजह है कि एशिया में ज्यादातर मामले सामने आते हैं। दरअसल, यहां लोग अक्सर मुर्गियों के करीब रहते हैं।

लस्सा वायरस
इस वायरस से संक्रमित होने वाली पहली शख्स नाइजीरिया में एक नर्स थी। यह वायरस चूहों और गिलहरियों से फैलता है। यह वायरस एक विशिष्ट क्षेत्र में होता है, जैसे पश्चिमी अफ्रीका। पश्चिम अफ्रीका में 15 फीसदी जानवर इस वायरस को ढोते हैं।

जुनिन वायरस
जुनिन वायरस अर्जेंटाइन रक्तस्रावी बुखार से जुड़ा है। वायरस से संक्रमित लोग ऊतक में सूजन, सेप्सिस और त्वचा से खून आने का शिकार होते हैं। इसके लक्षण इतने आम हैं कि बीमारी के बारे में पहली बार में कम ही पता लग पाता है।

क्रीमियन कांगो बुखार वायरस
क्रीमियन कांगो बुखार वायरस खटमल जैसे जीवों से फैलता है। यह वायरस इबोला और मारबुर्ग जैसे वायरस की ही तरह फैलता है। संक्रमण के पहले कुछ दिनों में मरीज के चेहरे, मुंह और अन्य कुछ अंगों से खून बहता है।

मचुपो वायरस
मचुपो वायरस बोलिवियन हेमोरेजिक फीवर से संबंधित है। इसे ब्लैक टाइफस के नाम से भी पहचाना जाता है। संक्रमण के कारण तेज बुखार और काफी खून बहता है। ये जुनिन वायरस की तरह विकास करता है। यह वायरस इंसानों से इंसानों में फैलता है।
 
स्यास्नूर फॉरेस्ट वायरस
वैज्ञानिकों ने 1955 में भारत के पश्चिमी तट में स्यास्नूर फॉरेस्ट वायरस (केएफडी) वायरस की खोज की थी। यह वायरस भी जीवों से फैलता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह निर्धारित कर पाना मुश्किल है कि यह किस खास जीव से फैलता है। इस वायरस के शिकार मरीजों में तेज बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द होता है। इससे रक्तस्राव भी होता है।
 
डेंगू का वायरस
डेंगू बुखार का खतरा लगातार रहता है। डेंगू का वायरस मच्छरों से फैलता है। इस बुखार से हर साल 5 करोड़ से लेकर 10 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं। भारत और थाइलैंड जैसे देशों में डेंगू का खतरा काफी ज्यादा होता है। अन्य एशियाई देशों में भी ये वायरस गर्मी और बारिश के सीजन में कहर ढाता है और तमाम लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं।

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