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NIPAH : केरल के बाद तमिलनाडु, मुंबई-गोवा में भी अलर्ट, बचाव के ये हैं तरीके

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  • केरल में नीपा वायरस से मरने वालों की संख्‍या हुई 12, इनमें एक नर्स भी शामिल

नई दिल्ली। केरल के कोजीकोड में नीपा नाम के वायरस से एक दर्जन लोगों की मौत के बाद हड़कंप मचा है। केरल में इस वायरस के कारण मरने वालों की संख्‍या 9 से बढ़कर 12 हो गई है। मरने वालों में एक नर्स भी है। इसके बाद अब तमिलनाडु, मुंबई और गोवा में भी वायरस से सावधान रहने का अलर्ट जारी किया गया है और अस्पताल भी इसके लिए तैयार हो रहे हैं। वजह ये है कि इस वायरस से बचने का कोई टीका अब तक नहीं आया है। साथ ही नीपा वायरस इतना खतरनाक है कि इससे पीड़ित व्यक्ति का बचना नामुमकिन हो जाता है।

1998 में हुई थी पहचान
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक नीपा वायरस से जानवरों और इंसानों को खतरा होता है। इस वायरस की पहचान 1998 में मलेशिया और सिंगापुर में हुई थी। उस वक्त इस वायरस को सुअरों में पाया गया था, जिनसे ये इंसानों तक पहुंचा था। उस वक्त 265 लोग नीपा से पीड़ित मिले थे। जिनमें से 40 फीसदी की हालत बहुत ही गंभीर हो गई थी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक नीपा वायरस टेरोपोडीडे फैमिली और टेरोपस जीनस का है।

कैसे फैलता है नीपा वायरस ?
नीपा वायरस फैलाने का मुख्य स्रोत चमगादड़ होते हैं। इसके अलावा सुअरों और इंसानों के बीच भी ये तेजी से फैलता है। साल 2004 में देखा गया था कि जिन इंसानों ने खजूर खाया या उसका रस पीया, उन्हें भी इस वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया था। वजह ये थी कि खजूर को चमगादड़ों की एक प्रजाति भी खाती थी। वहीं, बांग्लादेश में पाया गया कि इंसानों से इंसानों में भी ये वायरस फैल जाता है।

नीपा वायरस के लक्षण
डब्ल्यूएचओ के एक्सपर्ट्स के मुताबिक नीपा वायरस हवा से नहीं फैलता, लेकिन इससे अगर किसी इंसान में ये वायरस आ जाए तो दूसरा इंसान भी इस वायरस से पीड़ित हो जाता है।

वायरस पीड़ित इंसान का क्या होता है ?
जिस इंसान या जानवर में नीपा वायरस पैर पसार लेता है, उसे तेज बुखार आता है और दिमाग में सूजन आ जाती है। रोगी अनाप-शनाप बातें करने लगता है। ध्यान न देने पर 24 से 48 घंटे में मरीज कोमा में चला जाता है। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत भी इस वायरस से ग्रस्त होने की निशानी है। अगर किसी में ऐसे लक्षण दिख रहे हों, तो तुरंत उसे पास के अस्पताल ले जाएं।

नीपा वायरस का इलाज क्या ?
नीपा वायरस से बचने का अब तक कोई टीका नहीं बना है। इससे ग्रस्त मरीज को अस्पताल में ही इंटेंसिव केयर यूनिट में रखना पड़ता है।

खजूर मत खाएं
अगर किसी इलाके में नीपा वायरस की पहचान हो जाए, तो खजूर न खाएं और उसका रस भी न पीएं। इसके अलावा मरीज के आस-पास ज्यादा न रहें। ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो मरीज को तुरंत अस्पताल में दाखिल कराना जरूरी है। इसके अलावा सुअरों, चमगादड़ वगैरा से भी दूरी बनाए रखने की खास जरूरत होती है। इसके अलावा बचाव के लिए मास्क और दस्ताने पहनने चाहिए।

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