पेट्रोल की कीमतों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना, लेकिन कांग्रेस ने भी तो यही किया था

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नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के साथ मोदी सरकार पर निशाना भी खूब सध रहा है कि वो आम लोगों को राहत देने के लिए टैक्स में कोई कटौती नहीं कर रही है, लेकिन हकीकत ये है कि मोदी सरकार ही नहीं, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी, तब भी उसने क्रूड में उछाल के बाद पेट्रोल और डीजल के टैक्स में कोई रियायत नहीं दी थी।

अभी कितनी है पेट्रोल-डीजल की कीमत
पिछले 9 दिन में पेट्रोल के दाम 2.24 रुपए प्रति लीटर और डीजल के 2.15 रुपए प्रति लीटर बढ़ चुके हैं। मंगलवार को पेट्रोल में 30 पैसे और डीजल में 26 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 80 रुपए को पार कर गई। वहीं, दिल्ली में पेट्रोल  76.87 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया है, जबकि डीजल के दाम भी रिकॉर्ड स्तर पर 68.08 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं।

2012 के इन आंकड़ों पर भी गौर करना जरूरी
ऐसा नहीं है कि पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमत से राहत देने के लिए मोदी सरकार के दौर में ही कुछ नहीं हो रहा है। 2012 में जब कांग्रेसनीत यूपीए की सरकार थी, तब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिली थी। जनवरी 2012 में मनमोहन सिंह सरकार के दौर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। 2014  में हुए आम चुनावों तक कच्चे तेल की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रही थी। 2012 में जब क्रूड ऑयल की कीमत सबसे ज्यादा थी, तो  दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल 73 रुपए से 67 रुपए प्रति लीटर बिका था। जब 2014 में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट शुरू हुई, तब भी पूरे साल के दौरान दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 73 रुपये से 63 रुपये प्रति लीटर तक बेचा गया। यानी तब भी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कोई रियायत नहीं की थी।

और भी बढ़ सकती है कीमत
वैश्विक संस्था ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) की भविष्यवाणी है कि दुनिया की मौजूदा आर्थिक स्थिति में 2020 तक क्रूड ऑयल की कीमत 270 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। बता दें कि 2008 में क्रूड ऑयल अब तक के सर्वाधिक स्तर 145 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं 2015 और 2016 के दौरान खाड़ी देशों में जारी विवाद और चीन समेत विकासशील देशों में मांग की कमी के कारण क्रूड ऑयल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर गिरा था। ओईसीडी की भविष्यवाणी का आधार ये है कि आने वाले कुछ साल में चीन और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं रफ्तार पकड़ने के लिए ईंधन की मांग में बड़ा इजाफा कर सकती हैं।

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