कर्नाटक : 23 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे कुमारस्वामी

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बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का मौका मिलने के बावजूद भाजपा बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने में नाकाम रही। है। शनिवार (19 मई) को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के पहले ही मुख्यमंत्री बीएस येद्दयुरप्पा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब कांग्रेस-जदएस गठबंधन के नेता एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे। उनको 23 मई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इससे पहले मीडिया रिपोर्ट में कुमारस्‍वामी के 21 मई को शपथ लेने की बात कही जा रही थी, लेकिन इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्‍य तिथि होने के कारण इसे टालकर 23 मई कर दिया गया है।

मुश्किल नहीं कुमारस्‍वामी के लिए बहुमत जुटाना

येदियुरप्‍पा के इस्‍तीफे के बाद राज्यपाल वजुभाई वाला ने एचडी कुमारस्वामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। विधानसभा के गणित को देखते हुए कुमारस्वामी के लिए बहुमत साबित करना मुश्किल नहीं होगा। कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 38 विधायकों को मिलाकर उनके पास 115 का संख्‍या बल है, जो बहुमत के आंकड़ों से ज्‍यादा है। हां, उनके समक्ष गठबंधन को एकजुट रखने की चुनौती जरूर होगी। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता जदएस के साथ गठबंधन पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठा चुके हैं। यही नहीं, विधानसभा चुनाव भी दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ लड़ा था।

शपथग्रहण समारोह में विपक्षी दलों को न्योता

कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रहे जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने शपथग्रहण समारोह में सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किया है। मीडिया से बातचीत में कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अन्य क्षेत्रीय नेताओं को उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसी चंद्रशेखर राव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मुझे बधाई दी है। बसपा प्रमुख मायावती ने भी अपना आशीर्वाद दिया है। मैंने इन सभी क्षेत्रीय नेताओं को शपथग्रहण में आमंत्रित किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बिगड़ा येदियुरप्‍पा का गणित

बीएस येदियुरप्पा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि लिंगायत नेता होने के कारण विपक्ष के कई विधायक उनके समर्थन को तैयार हैं। राज्‍यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय मिलने के बाद येदियुरप्पा के इस दावे पर यकीन भी होने लगा था। लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनका सारा गणित गड़बड़ा दिया। अदालत ने उन्हें एक दिन में ही विश्वास मत हासिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को इतना सुरक्षित कर लिया कि उनके टूटने की कोई आशंका ही नहीं बची। परिणाम यह हुआ कि येदियुरप्‍पा को मुंह की खानी पड़ी।

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