ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने बनाया कोलेस्ट्रॉल घटाने वाला इंजेक्शन

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  • कोलेस्ट्रॉल घटाने वाले इंजेक्शन से 25% तक कम हो जाएगा हार्ट अटैक का खतरा

लंदन। हृदय संबंधी रोगों या समस्‍याओं से ग्रस्‍त लोगों के लिए एक राहत वाली खबर है। ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने एक ऐसा इंजेक्शन बनाने में सफलता पाई है, जिससे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटाई जा सकेगी। यह इंजेक्‍शन लगाने के बाद हार्ट अटैक के खतरे को 25 फीसदी तक कम किया जा सकता है। एक शोध के बाद विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे हैं।

कैसे किया शोध ?

विशेषज्ञों ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 19,000 मरीजों पर अध्ययन किया। इस शोध में शामिल सभी मरीजों को या तो पहले हार्ट अटैक हो चुका था या फिर वे हृदय संबंधी अन्य समस्या से पीडि़त थे। जब खान-पान, एक्‍सरसाइज और स्‍टेटिन से उनका बैड कोलेस्‍ट्रॉल कम नहीं हुआ तो उन्‍हें एलिरोक्यूमैब इंजेक्‍शन दिया गया। शोध के दौरान देखा गया कि एलिरोक्यूमैब इंजेक्‍शन से हृदय संबंधी बड़ी समस्याओं के खतरे को 15 फीसदी तक कम करने में सफलता मिली। बाजार में यह दवा ‘प्रालुएंट’ के नाम से उपलब्ध है। जिन मरीजों के कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा था और उन्हें प्रालुएंट और स्टेटिन एक साथ देने पर हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा 24 फीसदी तक कम हो गया।

दो साल पहले मिली थी मंजूरी

इस शोध के परिणाम बीते माह यूएस कार्डियोलॉजी कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किए गए। करीब दो साल पहले ब्रिटिश दवा नियंत्रक ‘नाइस’ ने एलिरोक्यूमैब के लिए एनएचएस को मंजूरी दी थी। यह इंजेक्शन ऐसे लोगों को ही लगाने की मंजूरी दी गई थी, जिनके परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा है।

कितना आएगा खर्चा ?

विशेषज्ञों ने बताया कि इस इलाज पर एक साल में 4,08,066 रुपये का खर्च आएगा, मगर इसके इस्तेमाल से हार्ट अटैक की आशंका को 25 फीसदी तक कम किया जा सकता है। प्रत्येक दो या चार हफ्ते में दिए जाने वाले इस इंजेक्शन को सनोफी और रीजेनेरॉन ने विकसित किया है। रीजेनेरॉन के डॉ. जॉर्ज यानकोपूलस ने कहा कि कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें एक बार हार्ट अटैक हो चुका है और उन्हें कोलेस्ट्रॉल स्तर घटाने की बेहद जरूरत है। इन मरीजों को प्रालुएंट से भविष्य के खतरे घटाने में काफी मदद मिली।

कोलेस्ट्रॉल क्या है ?

कोलेस्ट्रॉल एक मोम या वसा जैसा पदार्थ होता है, जो लीवर द्वारा निर्मित होता है। यह विटामिन डी, पाचन और कुछ हार्मोन के निर्माण में सहायक होता है। कोलेस्ट्रॉल पानी में घुलता नहीं है, इसलिए वह शरीर के अन्य अंगों में खुद नहीं पहुंच सकता। लिपोप्रोटीन्स नामक कण कोलेस्ट्रॉल को रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों में पहुँचने में मदद करते हैं।

क्‍या है खराब और अच्‍छा कोलेस्‍ट्रॉल ?

लिपोप्रोटीन भी दो तरह के होते हैं। पहला, कम घनत्व वाला लिपोप्रोटीन जिसे LDL या खराब कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है। दूसरा है, उच्च घनत्व वाला लिपोप्रोटीन यानी HDL जिसे अच्छा कोलेस्ट्रॉल भी कहा जाता है। अगर HDL की मात्रा बहुत कम हो जाए या LDL की मात्रा अधिक हो जाए तो वह धमनियों में जम सकता है और रक्‍त प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकता है। इससे हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जैसे दिल का दौरा या स्ट्रोक। यह समस्‍या किसी भी उम्र के व्‍यक्ति में हो सकती है।

भारत में उच्च कोलेस्ट्रॉल

भारत में जनसंख्या आधारित अध्ययनों में सामने आया है कि यहां कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ रहा है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि शहर की 25-30% और ग्रामीण क्षेत्र की 15-20% आबादी उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्‍या से पीडि़त है। हालांकि इसके बावजूद यह स्तर उच्च आय वाले देशों से काफी कम है।

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