आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस बना रहा है मशीनों को इंसानों से तेज

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मुंबई। ईश्‍वर ने मनुष्य को कई बेमिसाल तोहफे दिए हैं। इनमें हमारी प्रकृति और पर्यावरण भी शामिल हैं। लेकिन इंसानों को जो सबसे महत्‍वपूर्ण तोहफा मिला है, वह है उसका दिमाग या बुद्धि। वास्‍तव में आज इंसान ने जो कुछ भी हासिल किया है, वह अपनी बुद्धि की बदौलत ही। जिस तरह से फोन, कंप्‍यूटर, हवाई जहाज, रॉकेट आदि चीजों का आविष्‍कार हुआ है, वह इंसान की बुद्धि का ही कमाल है। सच कहें तो इंसान अपनी बुद्धि के जरिए कुछ भी हासिल कर सकता है। यह इंसानी बुद्धि का ही कमाल है कि उसने आज कृत्रिम बुद्धि (artificial-intelligence) बनाने में भी सफलता हासिल कर ली है। इस विषय पर मैट्रिक्स, आई रोबोट, टर्मिनेटर, ब्लेड रनर जैसी फिल्‍में भी बन चुकी हैं, जो सुपरहिट साबित हुई हैं।

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता का अर्थ है बनावटी तरीके से विकसित की गई बौदि्धक क्षमता। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 के दशक में हुई। इसके जरिए ऐसा कंप्यूटर या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जो इंसानों की तरह की काम कर सकें। इसके लिए इन मशीनों में प्रोग्रामिंग की जाती है और ये उतना ही काम कर सकती हैं जितना उनके प्रोग्रामिंग में निर्देश दिया जाता है। ये मशीनें उसी तरह काम करती हैं, जैसे मानव मस्तिष्‍क, लेकिन ये खुद कोई निर्णय नहीं ले सकतीं। हालांकि अब वैज्ञानिक ऐसी मशीनों के निर्माण में जुट गए हैं, जो इंसानों की तरह सोच सकें और उनकी तरह निर्णय भी ले सकें।

कहां हो रहा AI का इस्‍तेमाल ?

वर्तमान में ऐसी बहुत सी मशीनें हैं जो कई तरह के कार्य करती हैं। उदाहरण के लिए सेल्फ ड्राइविंग कार, पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट AI से ही संचालित होते हैं। यही नहीं, अपने पीसी या लैपटॉप पर आप जो चेस खेलते हैं, वह भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही उदाहरण है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस डीप ब्ल्यू कंप्यूटर ने वर्ल्‍ड चैंपियन कास्परोव को शतरंज में हरा दिया था। यही नहीं, गूगल के अल्फागो ने मानव को एक कंप्यूटर बोर्ड खेल ‘गो’ में हराया था।

पूरी दुनिया में AI पर हो रहा अध्‍ययन

आज उन्‍नत एल्‍गोरिद्म, कंप्‍यूटिंग पावर और स्‍टोरेज क्षमता में सुधार के कारण कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता को लोकप्रिय बना पाना संभव हुआ है। हाल ही में आए आंकड़ों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ग्‍लोबल मार्केट 62.9  फीसदी की दर से बढ़ रहा है। आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दुनियाभर में जोर-शोर से अध्‍ययन हो रहा है, साथ ही इस पर काफी इन्वेस्ट भी हो रहा है। आपको बता दें कि आईबीएम कंपनी एक ऐसा आर्टिफिशियल ब्रेन बनाने में लगी है, जिसकी क्षमता मनुष्य से भी आगे निकल जाए। हालांकि इसके अपने खतरे भी हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्‍व

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पॉवर यह है कि इसके जरिए हम गरीबी और बीमारी को खत्म करने का टारगेट बना सकते हैं। आज स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, विनिर्माण क्षेत्र, चिकित्‍सा अनुसंधान, अंतरिक्ष स्‍टेशन, बैंकिंग जैसे हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत है। इन सभी क्षेत्रों में मशीनों की भारी मांग है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसी मशीनें बनाई जा सकती हैं जो इंसानों के काम में मदद कर सकें। जिस कार्य को इंसान हफ्तों या महीनों में करता है, इन मशीनों की मदद से वे कम समय में पूरे किए जा सकते हैं क्‍योंकि ये मशीनें बिना थके काम कर सकती हैं। यही नहीं, अब तो ऐसे रोबोट भी तैयार हो रहे हैं, जो इंसानों की तरह बात करते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अपने खतरे भी

दुनिया में हर चीज के अगर फायदे हैं तो उनके नुकसान भी हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जितने फायदे हैं, उससे कहीं ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अपने खतरे भी हैं। इसका सबसे प्रमुख खतरा है कि ऐसी मशीनें अगर बहुतायत में हो गईं तो नौकरियों की संख्‍या में भारी गिरावट आ जाएगी। हम मशीनों पर ज्‍यादा निर्भर हो जाएंगे। दूसरे, मशीनों के आ जाने से इंसान की मेहनत करने की आदत छूट जाएगी। वह पढ़ाई और हर चीज के लिए मशीन की सहायता लेने लगेगा और वह अपने दिमाग का इस्‍तेमाल ही नहीं करेगा। और फिर सबसे बड़ा खतरा तो यह है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से शक्तिशाली स्वचालित हथियार बन सकते हैं या फिर ऐसे डिवाइस, जिनके सहारे चंद लोग एक बड़ी आबादी का शोषण कर सकें। यह अर्थव्यवस्था को भी बड़ी चोट पहुंचा सकता है। यह भविष्य में मशीनों को मनुष्य के नियंत्रण से आजादी दिला सकता है, जिसके कारण उनके साथ हमारा संघर्ष हो सकता है।

 

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