जिन चीफ जस्टिस के खिलाफ खड़े हुए थे चेलमेश्वर, उन्हीं के साथ बेंच करेंगे शेयर

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नई दिल्ली। आपको इस साल जनवरी का महीना याद होगा। इस महीने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए मीडिया से बात की थी। इन चार जजों में चीफ जस्टिस के बाद नंबर दो जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर भी शामिल थे। दोनों के बीच खाई पटी हो या नहीं, लेकिन अब जस्टिस चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस फिर साथ दिखने जा रहे हैं।

18 मई को बेंच में साथ बैठेंगे चेलमेश्वर और चीफ जस्टिस
चीफ जस्टिस की ओर से केस बंटवारे को मुद्दा बनाकर सवाल उठाने वाले चार जजों में से एक जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर 18 मई, 2018 को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 1 में मामलों की सुनवाई करेंगे। उनके साथ तीसरे जज डॉ. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ होंगे।

चीफ जस्टिस के साथ क्यों बैठेंगे चेलमेश्वर ?
दरअसल, जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर 22 मई को रिटायर होने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट में 18 मई के बाद गर्मी की छुट्टियां होने वाली है। परंपरा है कि जब भी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का कोई जज रिटायर होता है, तो उससे पहले अपने कार्यकाल के आखिरी दिन वो चीफ जस्टिस के साथ बेंच शेयर करता है। इसी वजह से जस्टिस चेलमेश्वर भी चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ बेंच शेयर करने वाले हैं।

बार एसोसिएशन का ठुकरा दिया है न्योता
बता दें कि जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से उन्हें दिए जाने वाले फेयरवेल का न्योता ठुकरा दिया है। बार एसोसिएशन हमेशा ही रिटायर होने वाले जजों को फेयरवेल पार्टी देता है, जिसमें चीफ जस्टिस समेत सभी जज शामिल होते रहे हैं। जस्टिस चेलमेश्वर ने ये कहते हुए फेयरवेल पार्टी में आने से मना कर दिया कि वो रिटायरमेंट को निजी मामला समझते हैं।

चीफ जस्टिस से पहले भी विरोध जताते रहे हैं
जस्टिस चेलमेश्वर ने तीन और जजों के साथ मिलकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ मीडिया से बात की थी, लेकिन इससे पहले से ही वो चीफ जस्टिस का विरोध करते रहे हैं। यहां तक कि जस्टिस चेलमेश्वर एक समय कॉलेजियम की बैठक तक में नहीं जाते थे।

सिद्धू के मामले में दिया फैसला
जस्टिस चेलमेश्वर ने रोड रेज के एक मामले में पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को बरी करने वाला अंतिम बड़ा फैसला सुनाया है। उस मामले में सिद्धू पर हत्या का भी आरोप था। जस्टिस चेलमेश्वर ने सिद्धू को हत्या के मामले में बरी करने का आदेश दिया और रोड रेज में दोषी पाते हुए 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

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