कर्नाटक : राज्यपाल के फैसले के खिलाफ SC पहुंची कांग्रेस, रात में ही सुनवाई की मांग

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  • अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्‍ट्रार को दी अर्जी, येदियुरप्‍पा का शपथग्रहण रोकने की मांग

नई दिल्ली। कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला द्वारा बीजेपी विधायक दल के नेता येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने के बाद कांग्रेस बुधवार (16 मई) रात को ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्‍यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के रजिस्‍ट्रार को अर्जी दी है। कांग्रेस ने बुधवार रात में ही इस याचिका पर सुनवाई की मांग की है। अब CJI इस अर्जी पर फैसला लेंगे कि सुनवाई रात में की जाए या नहीं।

क्‍या कहा है कांग्रेस ने याचिका में ?

खबर लिखे जाने तक (11.45 PM) कांग्रेस की ओर से दो वकील रात में ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्‍ट्रार को दी गई याचिका में गुरुवार सुबह होने वाले बीएस येदुरप्पा के शपथ शपथ ग्रहण को रोकने की मांग की गई है। गुरुवार सुबह 9 बजे राज्यपाल ने येदियुरप्पा को शपथ दिलाने का समय दिया है। कांग्रेस ने याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए कहा है। बता दें कि यह याचिका कांग्रेस और जेडीएस दोनों की तरफ से दायर की गई है।

राज्यपाल का फैसला गलत : कांग्रेस

कांग्रेस ने राज्यपाल वजूभाई वाला द्वारा येदियुरप्‍पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के फैसले को गलत बताया है। कांग्रेस ने राज्यपाल पर बीजेपी के मुखौटा होने का आरोप लगाते हुए अपने अधिकारों के इस्तेमाल की बात कही। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पीएम मोदी और अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा, ‘अमित शाह और मोदी ने आज संविधान का एनकाउन्टर किया है। मोदी और शाह ने संविधान को रौंद डाला। राज्यपाल ने मोदी और शाह से निर्देश लिए ना कि संविधान से।’

क्‍या बोले जेडीएस नेता कुमारस्वामी ?

जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने कहा है, ‘हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे, हम इसका सामना करेंगे। मोदी सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। गवर्नर द्वारा बीजेपी के 15 दिन का समय दिए जाने का मतलब विधायकों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने जैसा है। यह असंवैधानिक है।

पहले भी कई राज्‍यपाल ने लिये हैं विवादित फैसले

वर्ष 2009 : कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने पूर्ण बहुमत वाली बीएस येदियुरप्पा की सरकार को गलत तरीके से बहुमत साबित करने का आरोप लगाकर बर्खास्त कर दिया था !

वर्ष 2005 : बिहार के राज्‍यपाल बूटा सिंह ने विधानसभा भंग कर दी जबकि एनडीए सरकार बनाने के लिए निमंत्रण का इंतजार कर रही थी। बाद में कोर्ट ने राज्‍यपाल के फैसले को असंवैधानिक घोषित किया !

वर्ष 2005 : झारखंड के राज्‍यपाल सैयद सिब्ते रजी ने बिना बहुमत के शिबू शोरेन को मुख्‍यमंत्री बना दिया। 9 दिन बाद बहुमत के अभाव में सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा और अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में एनडीए ने सरकार बनाई !

वर्ष 1998 : उत्‍तर प्रदेश के राज्‍यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर जगदम्बिका पाल को 2 दिन का मुख्यमंत्री बनाया। कोर्ट ने राज्‍यपाल के फैसले को असंवैधानिक घोषित किया फिर कल्याण सिंह ने दोबारा सरकार बनाई !

वर्ष 1996 : गुजरात के राज्यपाल कृष्णपाल सिंह ने मुख्‍यमंत्री सुरेश मेहता द्वारा विधानसभा के फ्लोर पर विश्वास का मत हासिल करने के बावजूद विधानसभा भंग कर दी और केंद्र की एचडी देवेगौड़ा की सरकार ने उस पर मुहर लगाकर गुजरात में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करवा दी थी।

वर्ष 1988 : कर्नाटक के राज्‍यपाल पी वेंकटसुबैया ने बोम्मई की सरकार को विधानसभा में बहुमत खो चुकी बोलकर बर्खास्त कर दिया। कोर्ट ने फैसले को असंवैधानिक घोषित किया और बोम्मई ने फिर से सरकार बनाई !

वर्ष 1982 : हरियाणा के राज्‍यपाल जीडी तापसे ने देवीलाल की सरकार को हटाकर भजनलाल की सरकार बनवा दी थी !

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