प्रसिद्ध साहित्यकार और कवि बालकवि बैरागी ने दुनिया को कहा अलविदा

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  • 87 वर्ष की उम्र में मध्‍य प्रदेश के नीमच में एक कार्यक्रम में भाग लेने के थोड़ी देर बाद ली अंतिम सांस

नई दिल्ली। पूर्व सांसद, प्रसिद्ध साहित्‍यकार और कवि बालकवि बैरागी ने रविवार (13 मई) की शाम इस दुनिया को अलविदा कह दिया। कलम के साथ-साथ राजनीति पर भी गहरी पकड़ रखने वाले 87 वर्षीय बैरागी ने मनासा में अपने निवास पर शाम 6 बजे अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि नीमच में एक कार्यक्रम में शामिल होकर आने के थोड़ी देर बाद उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से साहित्य और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

बालकवि बैरागी का जन्म 10 फरवरी, 1931 को मंदसौर जिले की मनासा तहसील के रामपुर गांव में हुआ था। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए किया। कविताएं लिखना तो उन्होंने कम उम्र से ही शुरू कर दिया था, कॉलेज के समय में उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय रूप से भागीदारी लेनी शुरू कर दी थी। वे मध्य प्रदेश की अर्जुन सिंह सरकार में खाद्य मंत्री रहे और फिर राज्यसभा के सदस्य भी रहे। मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें ‘कवि प्रदीप सम्मान’ से नवाजा था। उन्हें कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था।

चौथी कक्षा में लिखी पहली कविता

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वह चौथी कक्षा में पढ़ते थे, तब उन्होंने पहली कविता लिखी। उस कविता का शीर्षक था ‘व्यायाम’। उन्होंने बताया कि बचपन में उनका नाम नंदरामदास बैरागी था और इस कविता के कारण ही उनका नाम नंदराम बालकवि पड़ा, जो आगे चलकर केवल बालकवि बैरागी हो गया। बालकवि बैरागी कलम के जादूगर होने के साथ-साथ मधुर कण्ठ के स्वामी भी थे।

बैरागी जी की प्रसिद्ध रचनाएं

बालकवि बैरागी की प्रसिद्ध रचनाओं में ‘करोड़ों सूर्य’, ‘सूर्य उवाच’, ‘दीवट (दीप पात्र) पर दीप’, ‘झर गये पात’, ‘गन्ने मेरे भाई!!’, ‘जो कुटिलता से जियेंगे’, ‘अपनी गंध नहीं बेचूंगा’, ‘मेरे देश के लाल’, ‘नौजवान आओ रे’, ‘सारा देश हमारा’ आदि शामिल हैं। उन्होंने बाल कविताएं भी लिखीं जो ‘शिशुओं के लिए पांच कविताएं’ शीर्षक से पांच खंडों में प्रकाशित हुईं।

सीएम शिवराज चौहान ने जताया शोक

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ ने बालकवि बैरागी के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि बैरागी मृदुभाषी और सौम्‍य व्‍यक्तित्‍व के धनी थे और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

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