हो जाएं सावधान ! CV में फर्जी जानकारी देना पड़ सकता है भारी

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  • संदेह होने पर भर्ती के समय कुछ प्राइवेट कंपनियां करा रही हैं पॉलीग्राफ टेस्‍ट

हैदराबाद। अगर आप अपनी CV में कोई फर्जी जानकारी या सूचना लिखकर अच्छी नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं तो सावधान हो जाइए। अब कॉर्पोरेट जगत और यहां तक कि कुछ मध्यम आकार की कंपनियां भी कर्मचारियों की भर्ती के समय काफी जांच-पड़ताल कर रही हैं। अगर कंपनी को जरा भी शक हो जाए कि आपने CV में कुछ संदिग्ध जानकारी दी है तो वे पॉलीग्राफ टेस्ट करा रही हैं।

हैदराबाद की लैब में हो रहा टेस्‍ट

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रचलन अब काफी तेजी से बढ़ रहा है। हैदराबाद में एक प्राइवेट फॉरेंसिक लैब के डायरेक्टर ने जीवीएचवी प्रसाद ने बताया, ‘पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए हर साल कंपनियां करीब 20 से 30 इम्‍प्‍लाई को हायर करने से पहले लैब भेजती हैं। हालांकि सारे टेस्ट कर्मचारी की अनुमति के बाद ही किए जाते हैं। यह परीक्षण साक्ष्यों की प्रामाणिकता जांचने के लिए कराया जाता है।’ उन्‍होंने बताया कि शहर की कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस टेस्ट के लिए भेजती हैं, वहीं कुछ कंपनियां भर्ती के दौरान CV में दी गई जानकारी की सत्यता जांचने के उद्देश्य से उम्मीदवारों का टेस्ट कराती हैं।

क्‍या है पॉलीग्राफ टेस्ट ?

पॉलीग्राफ यह एक ऐसी मशीन है जिसका प्रयोग झूठ पकड़ने के लिए किया जाता है। इसे लाई डिटेक्टर के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खोज जॉन अगस्तस लार्सन ने 1921 में की थी। जिस व्‍यक्ति की जांच करनी हो उसे इस मशीन से सेंसर के द्वारा जोड़ दिया जाता है। इसके बाद उस व्‍यक्ति के ब्‍लडप्रेशर, सांस एवं हृदय की गति और शरीर में होने वाले मूवमेंट को एक पेपर पर रिकॉर्ड किया जाता है। इस प्रक्रिया को ही ‘पॉलीग्राफ’ कहते हैं। जांच के दौरान अगर व्‍यक्ति के ब्‍लडप्रेशर, सांस एवं हृदय की गति में बदलाव दिखता है तो इसका मतलब है कि वह झूठ बोल रहा है।

यूरोपीय देशों में पॉलीग्राफ टेस्ट अनिवार्य

लैब के डायरेक्‍टर प्रसाद ने कहा कि यूरोपियन देशों में पॉलीग्राफ टेस्ट कर्मचारी का बैकग्राउंड जानने के लिए भर्ती प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। उन्‍होंने बताया कि हमारे पास लाई डिटेक्टर टेस्ट करने के उपकरण और एक्सपर्ट्स हैं। टेस्ट के समय हार्ट रेट, पल्स, ब्लड प्रेशर और पसीना आने जैसी चीजों पर गौर किया जाता है। साथ ही तरह-तरह के सवाल पूछे जाते हैं और इस प्रकार तैयार होने वाले ग्राफ की स्टडी करके नतीजे पर पहुंचा जाता है।

पॉलीग्राफ टेस्ट पर आता है 5-10 हजार का खर्च

प्रसाद ने बताया कि यह लैब अभी केवल कर्मचारियों से जुड़े मामलों को देखती है। प्रत्येक पॉलीग्राफ टेस्ट पर करीब 5 से 10 हजार का खर्च आता है। प्रसाद ने कहा कि हमने डीएनए परीक्षण और फिंगरप्रिंटिंग के लिए दिल्ली स्थित एक निजी लैब के साथ करार किया है।

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