ईरान परमाणु समझौते से अलग हुआ अमेरिका, फैसले का दुनियाभर में विरोध

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  • फैसले से भड़का ईरान, राष्‍ट्रपति रूहानी बोले – जरूरत पड़ी तो ज्यादा मात्रा में करेंगे यूरेनियम संवर्धन

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने मंगलवार (8 मई) को ईरान के साथ हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते को खत्‍म करने का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने कहा कि 2015 में हुआ यह समझौता एकतरफा था, जो होना ही नहीं चाहिए था। ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि परमाणु हथियारों को लेकर ईरान की मदद करने वाले देशों के खिलाफ अमेरिका कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू करेगा। उधर, अमेरिका और ईरान के अलावा इस समझौते में शामिल ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ट्रंप के इस फैसले पर खेद व्‍यक्‍त किया है।

क्‍या था समझौता ?

उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2015 में तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका व अन्‍य महाशक्तियों के साथ हुए इस परमाणु करार के बाद ईरान के ऊपर से अधिकतर अमेरिकी और अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिबंध हटा दिए गए थे। इसके बदले में, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने पर सहमति दी थी। ईरान ने अपने परमाणु संयंत्रों की निगरानी के लिए भी सहमति दे दी थी, यानी समझौते के बाद ईरान के लिए भारी निगरानी के बीच परमाणु बम बनाना असंभव हो गया था।

फैसले का क्‍या होगा असर ?

राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के इस फैसले का मतलब यह है कि ईरान की सरकार को अब यह तय करना होगा कि वह अमेरिका के नक्‍शेकदम पर चले या समझौते में बची-खुची चीजें समेट ले। हालांकि ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि उनका मुल्‍क इस करार में बना रहेगा। रूहानी ने कहा, ‘मैंने ईरान परमाणु ऊर्जा संगठन को भविष्य के कार्यों के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए हैं। यदि जरूरी हो तो ईरान अगले सप्ताह से ही पहले से कहीं ज्यादा मात्रा में यूरेनियम संवर्धन करेगा। मैं ट्रंप के फैसले पर यूरोप, रूस और चीन से बात करूंगा।’

ओबामा बोले – यह ऐतिहासिक भूल

पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने, जिनके कार्यकाल में यह समझौता हुआ, इस फैसले को भारी भूल करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका की वैश्विक साख को खत्‍म कर देगा। उन्‍होंने कहा कि ट्रंप का सौदा खत्‍म करने का फैसला गलत है क्‍योंकि ईरान समझौते पर अमल कर रहा था। पूर्व राष्‍ट्रपति ने कहा कि समझौता खत्‍म होने के बाद अमेरिका के पास दो ही विकल्‍प बचेंगे। पहला, या तो वह परमाणु शक्ति संपन्‍न ईरान को स्‍वीकार करे या फिर मध्‍य-पूर्व में एक और जंग की तैयारी में जुटे।

फैसले पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं

राष्‍ट्रपति ट्रंप के इस फैसले को लेकर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। ईरान के राष्‍ट्रपति ने इस फैसले पर काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं यूरोप ने अमेरिका के इस फैसले पर खेद जताया है। हालांकि सऊदी अरब और इजरायल ने इस फैसले की जमकर तारीफ की है। यूरोपियन यूनियन ने कहा, ‘हम इस परमाणु समझौते को संरक्षित करेंगे।’ यूएन के जनरल सेक्रेटरी एंटोनिया गुटर्स ने कहा, ‘मैं अन्य जेसीपीओए (जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ ऐक्शन) प्रतिभागियों को इस समझौते का समर्थन करने और अन्य सभी सदस्य-राज्यों के तहत अपनी संबंधित प्रतिबद्धताओं से पूरी तरह से पालन करने की मांग करता हूं।’

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