CJI के खिलाफ महाभियोग : कांग्रेस को ‘सुप्रीम’ झटका, वापस लेनी पड़ी याचिका

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  • कांग्रेस सांसदों की ओर से कपिल सिब्बल ने पांच जजों की संविधान पीठ के गठन पर उठाए सवाल
  • पांच जजों की पीठ ने संवैधानिक पीठ के गठन से जुड़े प्रशासनिक ऑर्डर की कॉपी दिखाने से किया इनकार

नई दिल्‍ली। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को उपराष्ट्रपति द्वारा खारिज करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिका नाटकीय घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने वापस ले ली है। इसके बाद 5 जजों की संविधान पीठ ने इसे खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एके सीकरी, न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की संविधान पीठ ने कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा की याचिका पर सुनवाई की।

क्‍यों वापस ली गई याचिका ?

शीर्ष कोर्ट में मंगलवार (8 मई) को इस पूरे मामले में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। कांग्रेस की ओर से यह याचिका तब वापस ले ली गई, जब पांच जजों की पीठ ने संवैधानिक पीठ के गठन को लेकर प्रशासनिक ऑर्डर की कॉपी शेयर करने से इनकार कर दिया। दरअसल, कपिल सिब्बल ने संवैधानिक पीठ के गठन जुड़े प्रशासनिक ऑर्डर की कॉपी दिखाने की मांग की, ताकि वे इसे चुनौती दे सकें। जस्टिस सीकरी की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि उनके पास प्रशासनिक आदेश वाली कॉपी नहीं है। पांच जजों की बेंच ने दलील दी कि मामले की सुनवाई मेरिट पर होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि याचिका वापस ले ली जाए अथवा खारिज कर दी जाएगी। इसके बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली।

कपिल सिब्‍बल ने संविधान पीठ के गठन पर उठाया सवाल

गौरतलब है कि कांग्रेस की तरफ से इस याचिका को 5 जजों की संवैधानिक बेंच को सौंपने पर ऐतराज़ जताया गया। कांग्रेस सांसदों की ओर से कपिल सिब्बल ने पांच जजों की पीठ के गठन पर सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा, ‘याचिका को अभी नंबर नहीं मिला, यह एडमिट नहीं हुई, तो फिर रातोंरात ये संविधान पीठ किसने बनाई? इस पीठ का गठन किसने किया ये जानना जरूरी है। आखिर किस प्रशासनिक नियम के तहत संवैधानिक पीठ का गठन किया गया है?’ सिब्‍बल ने कहा कि हम आदेश की कॉपी मिलने के बाद इसे चुनौती देने पर विचार करेंगे।

एक दिन पहले ही हुआ था संविधान पीठ का गठन

उल्‍लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज करने के राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू के फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेस के दो सांसदों की याचिका पर सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया गया था। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह बहुत निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि संवैधानिक पीठ ने प्रशासनिक ऑर्डर की कॉपी शेयर करने से इनकार कर दिया।

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