जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र फिर आमने-सामने

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  • जस्टिस मदन बी. लोकुर और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के बीच कोर्ट में हुई गरमागरम बहस
  • एजी से पूछा, जजों की नियुक्ति को लेकर कितनी सिफारिशें लंबित तो एजी बोले – पता करना होगा

नई दिल्‍ली। जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और केंद्र के बीच शुक्रवार (4 मई) को सुप्रीम कोर्ट में भी सीधा टकराव देखने को मिला। जस्टिस मदन बी. लोकुर और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के बीच खूब गरमागरम बहस हुई।

क्‍या कहा जस्टिस लोकुर ने ?

मणिपुर के एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस लोकुर ने काफी तल्‍ख टिप्‍पणी की। उन्‍होंने एटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल से पूछा कि फिलहाल उच्‍च न्‍यायालयों में जजों की नियुक्ति को लेकर कोलेजियम की कितनी सिफारिश लंबित हैं? इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा, मुझे इसकी जानकारी जुटानी होगी। तब जस्टिस लोकुर ने व्‍यंग्‍य करते हुए कहा, ‘सरकार के साथ यही दिक्कत है। मौके पर सरकार कहती है कि जानकारी लेनी होगी।’

क्‍या बोले अटॉर्नी जनरल ?

जस्टिस लोकुर के सवाल पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोलेजियम को बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए। ज्यादा नामों की सिफारिश भेजनी चाहिए। कई उच्च न्यायालयों में 40 जजों के पद खाली हैं लेकिन कोलेजियम सिर्फ 3-4 नाम भेजता है और फिर कहा जाता है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। वेणुगोपाल ने कहा, यदि कोलेजियम की कोई सिफारिश नहीं है तो कुछ भी नहीं किया जा सकता। तब कोर्ट ने सरकार को याद दिलाया कि उन्हें नियुक्तियां करनी ही होंगी।

और क्‍या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?

गौरतलब है कि 17 अप्रैल को मणिपुर उच्च न्यायालय से गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक मामले के ट्रांसफर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा जैसे उच्च न्यायालयों में हालात खराब हैं। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के उच्च न्यायालयों में रिक्तियों के संबंध में 10 दिनों में हलफनामा दाखिल करने को कहा। बता दें कि जस्टिस केएम जोसफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की कोलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने तीन महीने बाद फाइल को वापस भेज दिया था।

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