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OMG : लखनऊ के KGMU में मिला 11 यूनिट HIV दूषित खून, चढ़ाने पर हो जाता AIDS

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लखनऊ। लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में HIV दूषित खून मिला। ये तो गनीमत थी कि मरीजों को ये खून चढ़ाने से पहले ही इसके दूषित होने का पता चल गया। इस मामले से साफ है कि खून देने वालों में ऐसे लोग भी हैं, जो नशा करते हैं या समलैंगिक संबंध रखते हैं।

कब का है मामला ?
11 यूनिट HIV दूषित खून मिलने का मामला 2017 में हुआ था। बताया जा रहा है कि बीते कई साल में ऐसे ही दूषित खून के तीन से पांच यूनिट मिलते रहे थे, लेकिन 2017 में HIV दूषित खून के ज्यादा मामले मिलने से KGMU प्रशासन के कान खड़े हुए।

HIV पीड़ितों की बढ़ रही संख्या
KGMU में HIV दूषित खून के यूनिट्स की संख्या ज्यादा होने से ये अंदेशा भी हो रहा है कि ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यूनिवर्सिटी की ब्लड ट्रांसफ्यूजन यूनिट की प्रमुख डॉ. तुलिका चंद्रा ने एक कार्यक्रम में बताया कि अगर खून में HIV वायरस है, तो इसे चढ़ाने पर संबंधित मरीज भी बीमार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इसी वजह से KGMU सावधानी बरतते हुए साल 2012 से ही खून की जांच कड़ाई से करता रहा है। डॉ. तूलिका चंद्रा के मुताबिक़, 3 लाख 10 हजार यूनिट्स की जांच में 2 हजार 300 यूनिट खून अब तक HIV पीड़ितों का मिला है।

आधुनिक NAT तरीके से दो जगह ही होती है जांच
डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि लखनऊ में KGMU और SGPGIMS  में ही खून की जांच आधुनिक NAT तरीके से होती है। बाकी जगह खून में HIV विषाणु की जांच के लिए पुराना ELISA तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है। NAT से सीधे पता चल जाता है कि खून मे कौन सा वायरस है, जबकि ELISA तकनीक से खून में मौजूद एंडीबॉडी और एंटीजन का पता चलता है। ऐसे में अगर किसी को HIV हुआ है और वायरस के शरीर में तुरंत पहुंचने पर ELISA जांच की जाए, तो बीमार होने का पता ही नहीं चलता है।

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