जिन्ना का विरोध सही, लेकिन गोडसे के मंदिर पर भी बोलें लोग : जावेद अख्तर

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  • अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्‍ना की तस्‍वीर के विवाद में गीतकार जावेद अख्‍तर भी कूदे

नई दिल्‍ली। वरिष्ठ गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुवार (3 मई) को ट्वीट कर कहा, ‘मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में लगी होना ‘शर्मिंदगी’ की बात है, लेकिन जो लोग जिन्ना की तस्वीर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं उन्हें उन मंदिरों का भी विरोध करना चाहिए जो गोडसे के सम्मान में बनाए गए हैं।’

क्‍या लिखा ट्वीट में ?

जावेद अख्तर ने ट्वीट में लिखा, ‘जिन्ना अलीगढ़ में न तो छात्र थे और न ही शिक्षक। यह शर्म की बात है कि वहां उनकी तस्वीर लगी है। प्रशासन और छात्रों को उस तस्वीर को स्वेच्छा से हटा देना चाहिए। लेकिन जो लोग उस तस्वीर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें अब उन मंदिरों के खिलाफ भी प्रदर्शन करना चाहिए जिन्हें गोडसे के सम्मान में बनाया गया।’

कैसे शुरू हुआ विवाद ?

विवाद तब शुरू हुआ जब अलीगढ़ से सांसद सतीश गौतम ने एएमयू के छात्रसंघ कार्यालय की दीवारों पर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्‍मद अली जिन्‍ना की तस्वीर लगी होने पर आपत्ति जताई। इसके बाद बुधवार को एएमयू परिसर में जमकर हिंसा हुई थी। छात्रों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे, जिसमें कम से कम 6 लोग घायल हो गए थे।

एएमयू के प्रवक्‍ता ने किया बचाव

एएमयू के प्रवक्ता शाफे किदवई ने यह कहकर जिन्‍ना की तस्वीर लगी होने का बचाव किया कि तस्वीर वहां दशकों से लगी हुई है। किदवई ने कहा कि जिन्ना विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्य थे और उन्हें छात्रसंघ की आजीवन सदस्यता दी गई थी। परंपरागत रूप से, छात्रसंघ कार्यालय की दीवारों पर सभी आजीवन सदस्यों की तस्वीरें लगाई जाती हैं।

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