कहीं आपको तो नहीं है ‘साढ़े तीन उंगलियों की बीमारी’ !

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नई दिल्ली। आज के समय में कंप्यूटर ने पेपर और पेन की जगह ले ली है। अगर किसी को कोई डाटा लंबे समय तक रखना है तो वो उसे कंप्यूटर में सेव कर लेता है। इससे डाटा लीक भी नहीं होता है और यह लिखने से ज्यादा आसान भी है।

ऑफिस हो या कॉलेज हर जगह लोग करीब 8-9 घंटे की-बोर्ड पर उंगलियों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर हम आपसे कहें कि की-बोर्ड पर उंगलियों से टाइपिंग की वजह से आपको ‘साढ़े तीन उंगलियों की बीमारी’ हो सकती है तो ये जानकर आपको अजीब जरूर लगेगा। लेकिन ये बात सच है। आइए जानते हैं क्या है साढ़े तीन उंगलियों की बीमारी –

हाल ही में हुई एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि की-बोर्ड पर ज्यादा समय तक टाइपिंग करने से यह बीमारी होती है। रिसर्च में कहा गया है कि हाथ की कलाई में एक ‘मिडियन नर्व’ होती है जिसके दबने के कारण ये परेशानी शुरू होती है। आम भाषा में इसे ‘साढ़े तीन उंगलियों की बीमारी’ कहा जाता है, लेकिन साइंस की भाषा में इसे ‘कार्पल टनल सिंड्रोम’ कहते हैं।

अध्‍ययन में बताया गया है कि ज्यादातर ये बीमारी युवा वर्ग में देखने को मिलती है क्योंकि आज की युवा पीढ़ी अपना अधिकांश समय कंप्यूटर पर बिताती है। आपको बता दें कि ये बीमारी 18 साल से 55 साल के लोगों में पाई जाती है।

क्‍या हैं इस बीमारी के लक्षण

– हाथ में दर्द

– हाथ सुन्न हो जाना

– हाथ में कमजोरी

– हाथ से कोई भरी चीज़ उठाने में तकलीफ

बीमारी से कैसे करें बचाव

– टाइपिंग करने के एक घंटे बाद 5 मिनट का ब्रेक लें

–  हाथ में रिस्ट बैंड पहन सकते हैं

– हाथ को खोलने-बंद करने की एक्सरसाइज करें

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